जानें क्‍यों, चाहकर भी पाकिस्‍तानी ड्रोन को पकड़ नहीं पा रहा भारत


सऊदी अरब स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्‍पादक कंपनी अरामको ऑइल फैसिलिटी पर ड्रोन हमले ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया। इस ड्रोन हमले से कंपनी के कच्‍चे तेल का उत्पादन महज आधा रह गया। ड्रोन हमले से निपटने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अभी रणनीति बना ही रही थीं कि पाकिस्‍तानी ड्रोन विमानों ने भारतीय सीमा में AK-47 गिराना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में ड्रोन विमान देश और वीवीआईपी की सुरक्षा के लिए गंभीर संकट बनेंगे। इससे निपटने के लिए भारत को न केवल अपनी रेडार क्षमता को मजबूत करना होगा बल्कि 'बालाकोट' हमले की तरह से पाकिस्‍तानी क्षेत्र में स्थित ड्रोन ठिकानों को नष्‍ट करने के लिए खुद को तैयार करना होगा। वरिष्‍ठ रक्षा विश्‍लेषक और पूर्व विंग कमांडर प्रफुल्‍ल बख्‍शी का मानना है कि पाकिस्‍तान ड्रोन आने वाले समय में भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर संकट बनने वाले हैं और इससे निपटने के लिए हमें दोतरफा रणनीति बनानी होगी। बख्‍शी ने नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन से बातचीत में कहा, 'पाकिस्‍तानी ड्रोन विमानों का भारतीय क्षेत्र में हथियार गिराना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर घटना है। ये ड्रोन विमान 26 जनवरी और 15 अगस्‍त को भारतीय क्षेत्र में घुसकर तबाही मचा सकते हैं। इन ड्रोन विमानों से निपटने क‍ि लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अभी तैयार नहीं हैं।' आईएएफ चीफ ने भी पाकिस्तान द्वारा छोटे ड्रोन से भारत में हथियार भेजने के मामले पर चिंता जताई थी। उन्‍होंने कहा था कि छोटे ड्रोन हमारे लिए नई चुनौती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। यह हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का मामला है। इसे लेकर जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं।

'
सीमा पर बिछाना होगा रेडार का जाल'
उन्‍होंने कहा, 'भारतीय सीमा सुरक्षा एजेंसी बीएसएफ के पास ऐसी कोई खास तकनीक या रेडार नहीं है जिससे इन छोटे पाकिस्‍तानी ड्रोन विमानों को पकड़ा जा सके। इंडियन एयरफोर्स ने सीमा पर कई जगहों पर रेडार तैनात किए हैं लेकिन वे सिर्फ बड़े ड्रोन विमानों को ही पकड़ पाते हैं। इस कमी का फायदा उठाकर पाकिस्‍तान छोटे ड्रोन से भारतीय क्षेत्र में हथियार भेज रहा है।' विंग कमांडर बख्‍शी ने कहा कि पाकिस्‍तानी ड्रोन की चुनौती से निपटने के लिए भारत को दोतरफा कार्रवाई करनी चाहिए। पहला-बीएसएफ को ऐसे रेडार दिए जाएं जो छोटे ड्रोन को पकड़ पाते हैं। ये रेडार गुजरात से लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर तक बेहद कम दूरी पर लगाए जाएं। इसके अलावा नेपाल और बांग्‍लादेश की सीमा पर भी इस तरह के रेडार की चेन बना दी जाए। यह कुछ उसी तरह से होगा जैसे नेवी ने दूसरे देशों के जंगी जहाजों और नावों को पकड़ने के लिए देश के विशाल समुद्री तटीय इलाके में रेडार लगाए हैं।'

'
ड्रोन के ठिकानों को भी करना होगा नष्‍ट'
उन्‍होंने कहा, 'भारत को अपनी ड्रोन को मार गिराने की क्षमता को भी मजबूत करना होगा। इसके तहत पाकिस्‍तान से लगी सीमा की सुरक्षा के लिए जिम्‍मेदार बीएसएफ को ऐसे हथियार और हाई टेक उपकरण मुहैया कराने होंगे जो छोटे ड्रोन को मार गिराने में सक्षम हों। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को ड्रोन के साथ-साथ उसको जिस जगह से संचालित किया जा रहा है, उस अड्डे को भी हेलिकॉप्‍टर आदि से हमला करके नष्‍ट करना होगा।' बख्‍शी ने कहा कि ज्‍यादातर छोटे ड्रोन को 5 से 10 किमी की दूरी से संचालित किया जाता है और ऐसी तकनीक मौजूद हैं जिससे ड्रोन को संचालित करने के ठिकाने का पता लगाया जा सकता है। बता दें कि भारत ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में हवाई हमला करके पाकिस्‍तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी ट्रेनिंग ठिकाने को नष्‍ट कर दिया था। जम्‍मू कश्‍मीर में सुरक्षा एजेंसियों की सख्‍ती के बाद पाकिस्‍तान अब अपने पालतू आतंकवादियों को हथियारों की आपूर्ति करने के लिए छोटे ड्रोन का इस्‍तेमाल कर रहा है। पिछले दिनों पंजाब पुलिस ने बताया था कि सीमा पार से जीपीएस से संचालित ऐसे कई ड्रोन भारत में घुसे थे जो 10 किलोग्राम तक वजनी सामान को ले जा सकते हैं। पंजाब पुलिस के मुताबिक पाकिस्तान भारतीय सीमा में AK-47 राइफलों, हैंड ग्रेनेडों और पिस्टलों को गिराने के लिए इन ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। इसके बाद सेना और बीएसएफ के कान खड़े हो गए हैं।

ड्रोन से निपटने की तकनीक
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सेन्ट्रल एजेंसियां संदिग्ध ड्रोन्स को इंटरसेप्ट करने और उन्हें नष्ट करने के लिए स्काई फेंस, ड्रोन गन, ATHENA (अडवांस्ड टेस्ट हाई एनर्जी एसेट), ड्रोन कैचर और स्काइवॉल 100 जैसी तकनीकों का मूल्यांकन कर रही हैं। ड्रोन गन और स्काई फेंस उन सिग्नल्स को जाम कर देते हैं जिनका इस्तेमाल ड्रोन उड़ने के लिए करते हैं। इसी तरह ATHENA संदिग्ध ड्रोन्स पर हाई एनर्जी लेजर बीम की बारिश करता है, जिससे वह ड्रोन हवा में ही पूरी तरह नष्ट हो जाता है। दूसरी तरफ, ड्रोन कैचर तेजी से दुश्मन ड्रोन के पास पहुंचता है और एक जाल फेंककर उसे कैद कर लेता है। इसकी मदद से सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध ड्रोन से अहम सबूत जुटाती हैं। स्काइवॉल 100 ड्रोन कैचर का ही ग्राउंड वर्जन है जो संदिग्ध ड्रोन को नीचे गिरा देता है।

सिर्फ भारत ही नहीं कर रहा ऐसे खतरे का सामना
2 सप्ताह पहले सऊदी अरब के 2 प्रमुख ऑइल प्लांट्स पर ड्रोन अटैक हुआ था। यमन के हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी, जबकि सऊदी अरब ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। पिछले महीने ताकतवर विस्फोटकों से लैस 2 ड्रोन्स के जरिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हत्या की कोशिश हुई थी। इसके अलावा, कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट 2014 से ही ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। भारत एक नई ड्रोन पॉलिसी पर काम कर रहा है और इसमें संभावित आतंकी खतरे से निपटने को प्राथमिकता दी जाएगी।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट