भिखारी की मौत के बाद झोपड़ी से मिले थे 10 लाख रुपये, दावे के लिए सामने आए बेटे


पिछले दिनों मुंबई में जिस भिखारी की मौत के बाद उसके घर से करीब 10 लाख रुपये की जमा-पूंजी मिली थी, अब उसके पांचों बेटे शव और पैसों पर दावा करने आगे आए हैं। बता दें कि भिखारी की पिछले दिनों गोवंडी स्टेशन के पास ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। इसके बाद उसके घर से 1.77 लाख रुपये के सिक्के और 8.77 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट के पेपर्स मिले थे। शुक्रवार करीब 9 बजे, बिरभीचंद आजाद गोवंडी स्टेशन के पास ट्रैक पार कर रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार ट्रेन ने उन्हें कुचल दिया। इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। जीआरपी पुलिस ने शव की पहचान की और उसे लेकर टाटा नगर स्थित झुग्गी बस्ती स्थित भिखारी के झोपड़े में पहुंचे। अंदर का नजारा देखकर पुलिसवालों की आंखें फटी रह गई। झोपड़ी सिक्कों से भरी पड़ी थी।

भिखारी के पैसे गिनने में पुलिस को लगे थे 6 घंटे
पुलिस को भिखारी के घर से 1.77 लाख रुपये के सिक्के और 8.77 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट के पेपर्स मिले। भिखारी ने पैन कार्ड, आधार कार्ड और सीनियर सिटिजन कार्ड भी बनवा रखा था। भिखारी की झोपड़ी में इतनी दौलत देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। चार बैगों में भरकर रखे गए सिक्कों को गिनने में भी पुलिस को छह घंटे लगे।

चार बेटे राजस्थान में, एक बेटा मुंबई में
पुलिस को कुछ कागजात भी मिले थे जिसमें उनका पता राजस्थान दिया था। इसके बाद उन्होंने राजस्थान पुलिस से भिखारी के परिवार को सूचित करने की गुजारिश की। मंगलवार को भिखारी के दो बेटों ने वाशी जीआरपी से संपर्क किया। पुलिस ने बताया कि भिखारी के चार बेटे तल्निया सरनेम का इस्तेमाल करते हैं जबकि पांचवां बेटा अपने पिता का सरनेम इस्तेमाल करता है। एक बेटा मुंबई में जबकि बाकी चारों राजस्थान में रहते हैं। आजाद की पत्नी मैथीदेवी राजस्थान में अपने एक बेटे के साथ उसके घर में रहती हैं।

पिता से संपर्क में नहीं थे बेटे
विक्रोली पार्क साइट इलाके में रहने वाले और फर्निचर कंपनी में काम करने वाले सवरमल तल्निया ने बताया, 'हम अपने पिता से संपर्क में नहीं थे। दो साल पहले मैंने उनसे आखिरी बार बात की थी।' सवरमल ने बताया, 'हम पांच भाई हैं- सुखदेवराम, राजकुमार, मैं, धारमल और सरजीत। मेरे पिता 1998 में दादा के देहांत के बाद आखिरी बार हमारे गांव सीकर (राजस्थान) आए थे। इसके बाद उनका तीन भाइयों से विवाद हो गया, जिसके बाद वह कभी वापस नहीं आए।

पूरी पड़ताल होने के बाद ही सौंपा जाएगा शव
आजाद के दूसरे बेटे राजकुमार ने बताया, 'जब हम मिलते थे तो वह खुश होकर बात करते थे। वह पैसों के लिए काफी सजग थे। 1977 में वह ओमान भी गए थे। उन्होंने वहां काफी पैसा कमाया और हमारे गांव में एक जमीन खरीदी। उसे लेकर हमारे परिवार में विवाद हो गया।' एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अथॉरिटीज को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये पांचों वाकई आजाद के बेटे हैं या नहीं, इसके बाद ही उन्हें शव सौंपा जाएगा।

भिखारी की जमा-पूंजी को पुलिस ने किया सील
वाशी जीआरपी के वरिष्ठ इंस्पेक्टर नंदकुमार सस्ते ने कहा, 'हम यह पता नहीं है कि उनके बेटे अब क्यों आए हैं लेकिन हमें पहले सारे कागजात देखने होंगे। एफडी में आजाद ने अपने सबसे बड़े बेटे को नॉमिनी बनाया था।' जीआरपी अधिकारियों ने कहा कि अगर कुछ लोग अपनी पहचान का सबूत नहीं दे पाएंगे तो उनका डीएनए टेस्ट होगा। एक दूसरे अधिकारी ने बताया, 'तब तक के लिए हम पैसों को सील कर देंगे।'

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