रातों-रात बदल गई 4 गांवों की किस्मत

जयपुर। महाराष्ट्र में भले ही सरकार न बनी हो, लेकिन जयपुर के 4 गांवों की दशा तो सुधर गई. महाराष्ट्र के 44 विधायकों को जयपुर से 20 किलोमीटर दूर एक ग्रामीण इलाके के रिजॉर्ट में ठहराया गया था उस रिजॉर्ट तक पहुंचने के लिए जो सड़क थी वो जयपुर जिले के आमेर तहसील के चार गांवों से होकर गुजरती थी उस सड़क में इतने गड्ढे थे कि लोगों को शाम ढलने के बाद गाड़ी लेकर निकलने में डर लगता था. दूर-दूर तक अंधेरा छाया रहता था. मगर जब महाराष्ट्र के विधायक इस रिजॉर्ट में आए तो कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके सरकार में शामिल मंत्रियों को भी उनकी आवभगत के लिए आना पड़ा. जब उनकी गाड़ियां हिचकोले खाने लगी और रात के अंधेरे में धूल में गाड़ियों की लाइटें भी डबडबाने लगी तो समझ में आया कि यहां जीना कितना मुश्किल है. मगर सरकार चाहे तो क्या न हो जाए. महज 5 दिनों के अंदर ना जाने कहां से बजट आया और किसने अप्रूव किया. रात-दिन अधिकारियों ने एक करके आड़े तिरछे लगे खंभों पर एलईडी ट्यूबलाइट लगा दी. सड़क बनाने के लिए गिट्टी गिरनी शुरू हो गई. रोली और कंकड़ पर रोलर चलने शुरू हो गए. धूल न उड़े उसके लिए पानी का छिड़काव भी किया जाने लगा और दर्जनों मजदूर सड़क को सुधारने में लग गए. जयपुर से 20 किलोमीटर दूर कुंडा की तलाई में बना रिजॉर्ट ब्यूना विस्ता इन दिनों सुर्खियों में है. 5 दिन वीआईपी मूवमेंट की वजह से क्षेत्र में अब कच्ची सड़क पक्की में तब्दील होने लगी है. यहां पिछले 2 दिनों से रोड़ी बिछाने का काम किया जा रहा है.
मालूम हो कि पीली तलाई गांव के पास बने ब्यूना विस्ता रिजॉर्ट में 5 दिनोँ तक महाराष्ट्र के 44 विधायकों को रुकवाया गया था. गांव वाले कह रहे हैं कि हमने आज तक कभी सड़क नहीं देखी थी. इस इलाके में कभी रोड लाइट नहीं देखा था. बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे. रात को निकलने में डर लगता था कि गाड़ी हादसे का शिकार हो जाएगी. मगर जब विधायक आए हैं और मंत्री आ रहे हैं तो दिन-रात काम चल रहा है. कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि हम तो इतना त्रस्त हो गए थे कि इलाके के पार्षद को जूते की माला पहना आते. नेताओं को अगर दिक्कत हुई तो सड़क चमका दी और हम पूरी जिंदगी सड़क और बिजली मांगते रहे तो किसी ने ध्यान तक नहीं दिया.

रिपोर्टर

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