गटर निर्माण के दौरान इमारत के सामने से मिट्टी खिसकी


गजानन कंस्ट्रक्शन कंपनी की लापरवाही का खुलासा

मीरा रोड
पिछले कई महीनों से मीरा-भायंदर में गटर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा हैलेकिन इसमें किस तरह की लापरवाही बरती जा रही हैउसका एक उदाहरण देखने को मिला है। मीरा रोड रेलवे स्टेशन के पास मच्छी मार्केट के सामने गटर निर्माण का काम किया जा रहा था। इसी दौरान एक रात वहां की दुकानों के सामने की जमीन धंस गई और दुकानों के सामने बड़ा-सा गड्ढा बन गया। सुबह जब दुकानदार दुकान खोलने पहुंचे तो वहां अपनी दुकान की हालत देखकर हैरान रह गए। इस वजह से वे कई दिनों से अपनी दुकान भी नहीं खोल पा रहे हैं और उन्हें काफी बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
        अब वे एमबीएमसी से सवाल पूछ रहे हैं कि गटर निर्माण कर रहे ठेकेदार और एमबीएमसी के अभियंता की लापरवाही के कारण घटी इस घटना के कारण उन्हें हो रहे नुकसान का क्या मनपा मुआवजा देगी। उनके इस सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा है। हमारे संवाददाता ने इस बारे में जानकारी लेने के लिए एमबीएमसी अयुक्त बालाजी खतगांकर से फोन पर संपर्क करने की काफी कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और हमारा संपर्क नहीं हो सका।
इसका जिम्मेदार कौन?
सवाल यह है गटर निर्माण में इस तरह की घटी घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है। जानकार बताते हैं कि जब भी इस तरह से गटर निर्माण का कार्य किया जाता है तो वहां लोहे या लकड़े के प्लेट लगाया जाता है। इससे निर्माण कार्य की जगह मिट्टी या जमीन खिसकने का खतरा बिलकुल नहीं रहता, लेकिन यहां के ठेकेदार और एमबीएमसी की लापरवाही और मिलीभगत तथा कमिशनखोरी की वजह से ऐेसा कुछ भी नहीं किया जाता और सीधे गटर को खोदकर काम शुरू कर दिया जाता है। आपको बता दें कि मीरा-भायंदर मे ंगटर निर्माण का ठेका गजानन कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक विजय पटेल को दिया गया है और इस कंपनी की लापरवाही का नतीजा शांति शॉपिंग सेंटर के पास स्थित मच्छी मार्केट के सामने के दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है।

हमने दिनांक 25.11.2019 को दैनिक हयूमन राइट्स टाइम्स में प्रकाशित किया है


नागरिकों के टैक्स के करोड़ों रुपए गटर में डालने का पुख्ता सबूत, जारी है ठेकेदार की दबंगई
गजानन कंस्ट्रक्श्न कंपनी की लापरवाही मीरा भायंदर के अन्य इलाकों में चल रहे गटर निर्माण में भी देखी जा सकती है। ठेकेदार की दबंगई की वजह से कई इलाकों में रात में गटर से निकली मिट्टी सड़क के किनारे छोड़ दी जाती है और वहां सुरक्षा का ना तो बोर्ड लगाया जाता है और ना ही कोई अन्य तरह की जानकारी दी जाती है। इस वजह से उन जगहों पर बड़ा हादसा होने का खतरा हमेश बना रहता है। इस तरह की घटना घट भी चुकी है। बरसात के समय इसी तरह खोदे गए गड्ढे में एक बाईकसवार के गिर जाने से उसकी जान चली गई थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि गजानन कंस्ट्रक्श्न कंपनी इन गटरों के निर्माण में दोयम दर्जे का मैटेरियल इस्तेमाल कर रही है। इस वजह से सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे ये गटर कितने टिकाऊ हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। सवाल यह भी है कि क्या एमबीएमसी गटर निर्माण के दौरान वहां जाकर चल रहे कामों और मैटेरियल की जांच करते हैं और करते हैं तो क्या उन्हें वहां की जा रही कालाबाजारी उन्हें नहीं दिखती? या फिर मामला कुछ और है। कहीं एमबीएमसी और ठेकेदार मिलकर जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए पानी में तो नहीं डाल रहे।  वर्ना क्या वजह है कि बिना प्लेट के चल रहे गटर निर्माण और रात में सड़क के किनारे पड़ी गटर से निकाली गई मिट्टी उन्हें नहीं दिखाई देती है। गजानन कंस्ट्रक्श्न के काले कारनामों के बारे में खुलासा करती खबरों को जनता तक पहुंचाने का हमारा सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।


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