मीरा-भायंदर में भी अवैध निर्माण ने पसारे पांव


प्रभाग अधिकारी का मनपा आयुक्त को ठेंगा


मीरा-भायंदर
अवैध निर्माणो तथा अनैतिक गतिविधियों के मेनचेस्टर का रूप धारण करते जा रहे मीरा-भायंदर शहर में अतिक्रमणकर्ता भूमाफियाओं के साथ ही मनपा अधिकारियों की भी खूब बल्ले-बल्ले हो रही है। जिस तरह से पहले भिवंडी, नालासोपारा, वसई-विरार इन अवैध निर्माणों के लिए बदनाम था, वही नासूर अब मीरा-भायंदर में फैल चुका है। मनपा के प्रभाग अधिकारियों के साथ ही विधि विभाग भी शहर में अनेक ठिकानों पर चल रहे अवैध निर्माणों को संरक्षण प्रदान कर भरपूर मलाई खा रहा है।
प्रभाग अधिकारी भी खा रहे मलाई
मजे की बात तो यह है, कि मनपा के छहो प्रभाग में तैनात प्रभाग अधिकारियों में से कुछ को छोड़कर कई बार रिश्वतखोरी के आरोप में जेल की हवा खा चुके हैं। इन्हें निलंबित किया जा चुका है, लेकिन सत्ताधारियों तथा मनपा के आला अधिकारियों की सांठगांठ से इनकी बहाली का प्रस्ताव महासभा में मंजूर कर उन्हें वापस इसी मलाईदार पद पर पुन: नियुक्त कर दिया जाता है, जहां वे सारे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर फिर से काली कमाई में जुट जाते हैं।
आयुक्त बालाजी खतगांवकर भी शक के घेरे में



स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण शासन-प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं, लिहाजा शक की सुई प्रभाग अधिकारी सुनील यादव के साथ ही मनपा आयुक्त बालाजी खतगांवकर की ओर भी घूमनी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार कोई भी जनप्रतिनिधि तथा संबंधित विभाग का अधिकारी अपने क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को बढ़ावा देने में संलिप्त पाया जाता है तो उसे उसके पद से मुक्त किया जाना चाहिए, जिसकी धज्जियां मीरा-भायंदर मनपा क्षेत्र में जमकर उड़ाई जा रही हैं। ताज्जुब तो यह है कि पिछले छह महीनों के दौरान मनपा आयुक्त की नजरों के सामने यह अवैध रूम बनते रहे, लेकिन उन्होंने मनपा के प्रभाग अधिकारी सुनील यादव को कोई निर्देश दिए, और न ही कोई कार्रवाई की।
भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसने में मनपा नाकाम
हां यह जरूर है कि मनपा अधिकारियों ने इस दौरान भूमाफिया संजय सोलंकी तथा उसके पार्टनर भावेश म्हात्रे को ठाणे न्यायालय से स्थगन आदेश लाने में मदद  जरूर की। बता दें कि सुनील यादव, चंद्रकांत बोरसे जैसे अपने भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसने में नाकाम मनपा आयुक्त बालाजी खतगांवकर धृतराष्ट्र की भूमिका अपनाने को विवश हैं, ऐसी धारणा शहरवासियों की बन चुकी है।
हमने इस मामले में सुनिल यादव का पक्ष भी जानने की कोशिश की और कई बार फोन पर उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और उनसे संपर्क नहीं हो सका। साथ ही हमने इस संबंध में एमबीएमसी के आयुक्त बालाजी खतगांवकर से भी संपर्क कर इस मामले की सत्यता और मनपा की कार्रवाई के बारे में जानने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने भी फोन नहीं उठाया और उनसे हमारा संपर्क नहीं हो सका।
 सुनील यादव का भूमाफियाओं को संरक्षण


वर्तमान में मनपा के प्रभाग क्रमांक - 1 में तैनात प्रभाग अधिकारी सुनील यादव भी उक्त भ्रस्ट अधिकारियों की श्रेणी में आते हैं, जिनके खुले संरक्षण में भूमाफियाओं द्वारा राई, मूर्धा, मोर्वा तथा उत्तान में बड़े पैमाने पर सरकारी तथा सीआरजेड प्रतिबंधित भूखंडों पर अवैध चालियों तथा गालों का निर्माण किया जा रहा है। मनपा आयुक्त बालाजी खतगांवकर के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए सुनील यादव के संरक्षण में भायंदर पश्चिम के मोर्वा गांव में सर्वे क्रमांक 58, हिस्सा क्रमांक 45 के सीआरजेड प्रभावित खेती के भूखंड पर भूमाफिया संजय सोलंकी द्वारा 60 से 70 रूम का निर्माण पिछले छह महीनों के दौरान किए जाने का मामला सामने आया है।
संजय सोलंकी ने आरोपों को नकारा
मोरवा में सिर्फ 20 रुम का निर्माण किया जा रहा है। 70 रुम के निर्माण करने की बात गलत है। यहां तीन बार तोड़क कार्रवाई की गई। इसमें लोगों का काफी नुकसान हुआ है। तीसरी बार तोड़क कार्रवाई करने के बाद प्रभाग क्रमांक 1 के प्रभाग अधिकारी सुनिल यादव ने हमें नोटिस भेजा। हमने उसपर स्थगनादेश  लिया है। हमने कोई अवैध निर्माण नहीं किया है और ना ही कोई अवैध काम कर रहे हैं। हमारा काम पूरी तरह वैध है और इसे किसी के संरक्षण की जरुरत नहीं है।
प्रभाग अधिकारी सुनील यादव के अवैध निर्माणों के संरक्षण के कारनामों की सिलसिलेवार दास्तान पढ़ें अगले अंको में

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