सुप्रीम कोर्ट में पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल

नई दिल्ली
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोमवार को पहली पुनर्विचार याचिका दायर हुई। जमीयत के सेक्रेटरी जनरल मौलाना सैयद अशद रशीदी ने यह याचिका दाखिल की। रशीदी मूल याचिकाकर्ता एम सिद्दीक के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने कहा- अदालत के फैसले में कई ऋुटियां हैं और संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा सकती है। रशीदी ने याचिका के साथ अदालत में  217 पन्नों के दस्तावेज भी पेश किए। इसमें कहा गया- कोर्ट ने माना है कि वहां नमाज होती थी, फिर भी मुसलमानों को बाहर कर दिया गया। 1949 में अवैध तरीके से इमारत में मूर्ति रखी गई थी, फिर भी रामलला को पूरी जमीन दे दी गई। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में हिंदू पक्ष की अवैधानिक कार्रवाई को अनदेखा कर दिया।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी समीक्षा की बात कही
अखिल भारतीय मुसलिम पसर्नल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने रविवार को कहा था कि देश के 99% मुसलमान अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा चाहते हैं। इस पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि एआईएमपीएलबी और जमीयते इस्लामी के बयान समाज को बांटने वाले हैं और ये लोग अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
याचिका में कहा- कोर्ट के फैसले में विरोधाभास
 याचिका में कहा गया कि कोर्ट के फैसले का पहला और दूसरा हिस्सा विरोधाभासी है। कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई है कि मस्जिद का निर्माण, मंदिर को तोड़कर नहीं किया गया था। 1992 का मस्जिद विवाद अवैध है। फिर कोर्ट ने यह जमीन दूसरे पक्ष को क्यों दे दी? मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दे दी गई, जिसकी न तो अपेक्षा की गई थी और न ही अदालत से इसकी मांग की गई थी। उन्होंने कहा- हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि याचिका में पूरे फैसले को चुनौती नहीं दी जा रही है।

रिपोर्टर

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