PM को मारने की थी माओवादियों की साजिश, पुणे की पुलिस ने आरोप-पत्र दायर किया

मुंबई। पुणे की पुलिस ने यलगार परिषद मामले में गुरुवार को दायर आरोप-पत्र में दावा किया है कि कुछ माओवादी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रची थी। साथ ही वह देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए हथियार हासिल करने की भी कोशिश कर रहे थे।यलगार परिषद मामले की जांच कर रही पुणे पुलिस ने इसी वर्ष जून में गिरफ्तार पांच माओवादियों सहित कुल दस आरोपितों के विरुद्ध 5160 पन्नों का आरोप-पत्र दायर किया। इन सभी पर प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की आर्थिक मदद से कोरेगांव-भीमा में यलगार परिषद का आयोजन कराने का आरोप है, जिसके बाद महाराष्ट्र में हिंसा भड़क उठी थी।


क्या हैं आरोप

रोना विल्सन और भगोड़े किशन दा समेत कई माओवादी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की साजिश रच रहे थे। वे देश में गृह युद्ध के हालात भड़काने के लिए हथियारों का जखीरा हासिल करने की भी फिराक में थे। भाकपा (माओवादी) देश में लोकतंत्र को उखाड़ फेंकने की दिशा में लगातार काम कर रही थी। पिछले साल दिसंबर में हुई यलगार परिषद में माओवादियों की अनुसूचित जाति के लोगों को लामबंद कर भड़काने की साजिश थी।


आरोप-पत्र में ये नाम

यलगार परिषद मामले के जांच अधिकारी एसीपी शिवाजी पवार ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केडी वाडणे की अदालत में पांच माओवादियों रोना विल्सन, नागपुर के वकील सुरेंद्र गडलिंग, नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शोमा सेन, रिपब्लिकन पैंथर्स के कार्यकर्ता सुधीर धवले एवं महेश राउत के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल किए।आरोप-पत्र में पांच ऐसे माओवादियों के भी नाम हैं, जो अभी पुलिस की पहुंच में नहीं आए हैं। इनके नाम हैं :-मिलिंद तेलतुंबणे, प्रकाश उर्फ रितुपम गोस्वामी, प्रशांत बोस उर्फ किशन दा, मंगलू एवं दीपू।


आठ जनवरी को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

इस मामले की प्राथमिकी 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में हुई यलगार परिषद के बाद एक जनवरी से तीन जनवरी तक पूरे राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद आठ जनवरी को दर्ज की गई थी। इसमें पुणे स्थित सांस्कृतिक संस्था कबीर कला मंच से जुड़े हर्षाली पोतदार, सुधीर धवले, सागर गोरखे, रमेश गईचोर, ज्योति जगताप एवं दीपक ढेंगले के नाम थे।जांच अधिकारी पवार के अनुसार उनकी जांच से साफ है कि यलगार परिषद एवं उससे पहले चलाई गई मुहिम के कारण ही भीमा-कोरेगांव में जातीय हिंसा भड़की। यह मुहिम न केवल भाकपा (माओवादी) के इन कार्यकर्ताओं की ओर से प्रेरित एवं निर्देशित थी, बल्कि उन्होंने आर्थिक मदद भी दी थी। मिलिंद तेलतुंबणे की भूमिका पर पवार ने कहा कि वह भाकपा (माओवादी) के शहरी नेटवर्क का संयोजन कर रहा था तो दूसरी ओर अनुसूचित जाति को संगठित कर रहा था।


राव, नौलखा पर और कसेगा शिकंजा

बता दें कि इसी मामले की अगली कड़ी में 28 अगस्त को पुलिस ने इनसे बड़े पांच माओवादी कार्यकर्ताओं वरवर राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नौलखा, अरुण फरेरा एवं वेरनन गोंसाल्विस के घरों पर छापे मारे थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन पांचों को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया था।दो माह बाद 28 अक्टूबर को पुलिस सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा एवं वेरनन गोंसाल्विस को तो गिरफ्तार करने में कामयाब मिली। लेकिन वरवर राव और गौतम नौलखा अब भी उसकी गिरफ्त में नहीं आ सके हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट में दाखिल आरोप-पत्र पुलिस को दूसरे चरण में गिरफ्तार किए गए माओवादियों पर फंदा कसने में भी मददगार सिद्ध होगा।

रिपोर्टर

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