लाईफ स्टाईल नहीं बदलने पर बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

मुंबई। पान-तंबाखू, शराब और सिगरेट का सेवन करने वाले अगर अपनी लाईफ स्टाईल में बदलाव नहीं लाते हैं, तब इनमे कैंसर होने की आशंका अधिक बढ़ जाती है इसलिए समय रहते इसे छोड़ देना चाहिये, ऐसी बाते  पद्म भूषण  सम्मान समेत कई सम्मानों से सम्मानित, राष्ट्रीय ही नहीं , बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पहचान बना चुके डॉ प्रफुल्ल देसाई ने कैंसर पर लिखित व संपादित अपनी अंग्रेजी बुक  कैंसर इसोफेगस  की अनौपचारिक चर्चा के दौरान कही।  टाटा मेमोरिरल अस्पताल के पूर्व निदेशक डॉ प्रफुल्ल देसाई ब्रीच कैंडी और बॉम्बे अस्पताल जैसे कई अस्पतालों में कैंसर के आपरेशन में अपने हुनर के जादू दिखा चुके हैं। इनके द्वारा संपादित  कैंसर इसोफेगस  बुक में कैंसर से जुड़े कई डॉक्टरों के लेख भी इसे सफल बनाने में अपना योगदान दिया, जो काबिलेतारीफ है।  ग्रांट मेडिकल कॉलेज एण्ड जे.जे. हॉस्पिटल मुंबई से सर्जरी में ग्रेजुएशन करने वाली डॉ रत्ना पारीख जो नायर हॉस्पिटल में लेक्चरर के रूप में भी काम कर चुकी हैं। समन्वय संपादिका के तौर पर  कैंसर इसोफेगस  बुक में चार चाँद लगाने की अहम भूमिका अदा की है। अन्ननली कैंसर पर बुक के मार्फत प्रकाश डालने वाली डॉ रत्ना पारीख ने डॉ प्रफुल देसाई से सर्जिकल आॅन्कोलॉजी के हुनर सीखा। वर्तमान समय में वे भारतीय आरोग्य निधि और ब्रीच कैंडी अस्पताल में बतौर कंसल्टेंट है। डॉ प्रफुल्ल देसाई और डॉ रत्ना पारीख के मुताबिक अन्ननली कैंसर का अंदाज लगाना बहुत ही आसान है, लेकिन अक्सर यह देर से पता चलता है। इसकी सर्जरी करने में बहुत ही अनुभवी और विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। केमो रेडियोथेरेपी  के आने और उसके सही उपयोग  होने  से जान बचने की दरे काफी बढ़ी है।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट