सृष्टि का विस्तार दो अक्षर से हुआ - श्री राम गोपाल जी महाराज

मुंबई हरिहर संत सेवा मंडल सेंचुरी मिल सेंचुरी कामगार  वसाहत गणेश मैदान वर्ली में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पंडित श्री राम गोपाल जी महाराज (वृंदावन धाम) भागवत कथा करते हुए कहा कि कलयुग केवल नाम अधारा पूज्य श्री महाराज जी ने बताया है कि भक्ति 9 प्रकार की होती है जो कि श्री कैलाश जी ने नौ प्रकार की भक्ति कराई है । नाम संकीर्तन यस्य स्मरण पाद से विन म्र अर्चना वंदनम दास आत्म निवेदन भगवान की भक्ति नौ प्रकार से करते हैं । जिसके पास में आंख नहीं है वह कानों से सुन कर के भक्ति करें, जिसके पास में हाथ नहीं है, वह भगवान की भक्ति नृत्य कर करके भी कर सकते हैं । जिसके पास में कुछ नहीं है ना धन है ना दौलत है ना स्वर है वह भगवान की भक्ति भाव सेकर सकते हैं भगवान के लिए भगवान भाव के बस में हैं कहते हैं भाव का भूखा हूं मैं भाभी एक सारे भाव से जो मुझे भाषा है भव से बेड़ा पार है ।  महाराज जी ने बताया है कि सृष्टि का विस्तार दो अक्षर से हुआ है समुद्र की नाभि से कमल कमल की नाभि से ब्रह्मा और ब्रह्मा जी के द्वारा सृष्टि का विस्तार हुआ है । ब्रह्मा जी ने अपने शरीर का मंथन करके सृष्टि का विस्तार हुआ है ब्रह्मा जी ने जो अपने शरीर का मंथन किया तो 10 मानस मानस पुत्र वे जैसे कि मनसे मरीचि अत्रि नेताओं से हुए त्वचा से भृगु ऋषि हुए और कहते हैं प्राण से वशिष्ठ जी आए हैं अंगूठे से शिव जी का अवतार हुआ है और ब्रह्मा जी की सीखते द्वारा शुक्र का जन्म एनी की 12 भगवान का अवतार हुआ था भगवान तो करुणानिधान है भगवान की शरण में जो वक्त पर आता है एक पैर आता है तो भगवान सात कदम आगे चलने के लिए तैयार हैं भक्त बस एक कदम रखनेआप मेन हैडिंग में लिखना की बेटी बेटी बेटी बेटी घर में होती है और बेटी से बढ़कर इस दुनिया में कोई भी दौलत कोई भी अमानत नहीं होती है महाराज जी ने बताया है कि बेटी समुद्र होती है उसे जो कुछ भी दो और सब लौटा देती है कहते हैं कि बेटे को मत नहीं पढ़ाई तो कोई बात नहीं बेटी को अवश्य पड़ा है बेटी अगर सही सुरक्षित है तो हमारा जीवन हमारा परिवार हमारा भारतवर्ष सुरक्षित है अगर बेटी सुरक्षित नहीं है तो इस संसार में कोई भी सुरक्षित नहीं है आज के समय कई लोग बेटियों को गर्भ में ही नष्ट कर देते हैं गर्भपात करा देते हैं महाराज जी ने एक सुंदर कविता बताइए कि वह कहते हैं कि बोए जाते हैं बेटे पर उग जाती हैं बेटियां खाद पानी बेटों को पर लहराती है बेटियां स्कूल जाते हैं बेटे पर पड़ जाती हैं बेटियां मेहनत करते हैं बेटे पर अब्बल आती है बेटियां जो खूब रुलाते हैं बेटे जब खूब रुलाते हैं बेटे तब हंसाती है बेटियां जब दर्द देते हैं बेटे तो मरहम लगाते हैं बेटियां आशा रहती है बेटों से पर पूर्ण करती हैं बेटियां इतने फरमा से भरे हुए हैं बेटे पर बेटे के जन्मदिन पर बांटी जाती है मिठाइयां पर इतनी खूबियों से भरे होने के बावजूद भी क्यों गर्भाशय गिराई जाती हैं बेटियां गर्भपात से क्यों बनाई जाती है बेटियां बेटे की रक्षा करें बेटी है तो कल है कल है तो हम हैं हम बदलेंगे युग बदलेगा हम सुधरेंगे युग सुधरेगा ।

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