निसिचर हीन करहु महि भुज उठाएं प्रण कीन्हि। सकल मुनिन के आश्रम जाहि जाहि सुख दीन्हि

ठाणे। श्री रामलीला मंडल दिवा द्वारा आयोजित जारी रामलीला के सातवें दिन की रामलीला में सुर्पणखा नकटी,  सीता हरण का बड़ा ही बेहतरीन प्रस्तुति से श्री राम भक्त आनंदित हो उठे। इस दौरान अतिथि के रुप पधारे विश्वनाथ दुबे, इंदुप्रकाश चौबे, मनोज पाण्डेय, विनीत पांडेय सहित आदि लोगों का मंडल अध्यक्ष सचिन चौबे, सचिव प्रदीप जायसवाल, सुरेंद्र तिवारी, पंचम चौहान आदि पदाधिकारियों द्वारा पुष्प गुच्छ, रामनामी, ट्राफी देकर सत्कार किया गया। भगवान श्री राम चित्रकूट से आगे बढ़ते हैं। तो एक पहाड़ दिखाई देता है। मुनियों से पूछते हैं कैसा पहाड़ है। मुनि लोग का बताते हैं, कि यह ऋषि मुनियों की हड्डियों का ढेर है। जिसे राक्षसों ने ऋषि-मुनियों को खाकर या ढेर लगाया है। यह सुनकर भगवान श्रीराम क्रोधित हो जाते हैं। दोहा-  निसिचर हीन करहु महि भुज उठाएं प्रण कीन्हि। सकल मुनिन के आश्रम जाहि जाहि सुख दीन्हि। प्रभु श्रीराम प्रतिज्ञा करते हैं, कि मैं धरती से निसिचरों को हीन कर दूंगा। पंचवटी में अपना निवास बनाते हैं, लक्ष्मण को भक्ति से समझाते हैं। तभी रावण की बहन सुपर्णखा पहुंचती है। विवाह का प्रस्ताव रखती है। और जब नहीं मानते तो, अपना भयंकर रूप दिखाती है। भगवान श्री राम के कहने पर लक्ष्मण जी उसके नाक कान काट लेते हैं। खरदूषण 14 हजार सेना के साथ राम से युद्ध करता है। जो एक ही बाण से सभी मारे जाते हैं। सुनो प्रिया व्रत रुचिर सुशीला, मैं कछु करब ललित नर नीला। भगवान श्री राम कहते हैं कि ऐ सीते अब मैं कुछ नर लीला करना चाहता हूं।  तब तक के लिए तुम अग्नि में निवास करो। सुपर्णखा रावण के पास पहुंचती है। रावण मारीच को लेकर पंचवटी पहुंचता है। मारीच स्वर्ण मृग बनता है। जिसे देख मां जानकी कहती हैं  यह सोने का मृग बड़ा ही अच्छा है। इसे मार कर लाओ। भगवान श्रीराम मृग के पीछे भागते हैं ।मरीज को जैसे ही बाण मारते हैं। मारीच हा सीता हा लक्ष्मण बचाओ। सीता जी लक्ष्मण को मदद के लिए भेजती हैं। उसी समय रावण बाबा का रूप बनाकर पहुंचता है ।सीता का हरण कर रावण आगे बढ़ता है। रेरे दुष्ट ठाढ़ कीन्हि होई, निर्भय चला जानेसि मोही। रावण जटायु को युद्ध के लिए ललकारता है। रावण जटायु के पंख काटकर अधमरा कर देता है। सीता को लेकर अशोक वाटिका में रखता है। उक्त रामलीला को सफल बनाने के लिए केशरी प्रसाद दूबे, वेद प्रकाश मिश्रा, गोबिंद चौहान, धीरज पांडेय, सोनू गुप्ता, नाना मिश्रा, बाबा मिश्रा, विनय शुक्ला, अनिल उपाध्याय, हरिशंकर शर्मा, ओम प्रकाश तिवारी, सतीष पांडेय, रमेश प्रजापति, रंजीत वर्मा, मनोज तिवारी, दिनेश सिंह,  सहित अन्य कमेटी के पदाधिकारी एकजुट होकर परिश्रम कर रहे हैंं।

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