संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का उल्हासनगर में सत्संग


हमे अपना ध्यान बाहर से हटाकर अंदर की और करना होगा:-संत राजिंदर सिंह

   उल्हासनगर.सावन कृपाल रूहानी मिशन व मानव एकता सम्मेलन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के सत्संग का कार्यक्रम 25 फरवरी, 2020 को उल्हास नगर के सेंचुरी रेयान क्लब के नजदीक स्थित रिजेंसी एंटीलिया ग्राऊंड में आयोजित किया गया।कार्यक्रम की शुरूआत में पूजनीय माता रीटा जी ने अपनी मधुर वाणी से गुरु अर्जुन देव जी महाराज की वाणी से एक शब्द ”तुम करो दया मेरे साईं “ का गायन किया।
तत्पश्चात संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपनी दिव्यवाणी में समझाया कि गुरु अर्जुन देव जी महाराज इस शब्द में पिता-परमेष्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि आप मुझ पर दयामेहर कीजिए ताकि मैं इस भवसागर को पार कर सकूं। इंसान होने के नाते हमारा ध्यान इस दुनिया की बाहरी आकर्षणों में फंसा रहता है और इसी ओर ध्यान देते हुए हम अपना सारा समय गंवा देते हैं। आप मुझ पर कृपा करें कि जो हमारा ध्यान बाहर की दुनिया के मोह-माया में फंसा हुआ है, वहाँ से हटे और हमारे सभी भ्रम दूर हो जाए ताकि मै अपना ध्यान बाहर की दुनिया से हटा कर आपके नाम के सिमरन मे लगा सकूं।आगे इस शब्द में गुरु अुर्जन देव जी महाराज फ़रमा रहे हैं कि जब हम अपना ध्यान प्रभु की ओर लगाकर नाम का जाप करते हैं तो हमें हर प्राणी में पिता-परमेश्वर की ज्योति दिखाई देती है, क्योंकि तब हमें यह अनुभव हो जाता है कि प्रभु की जो ज्योति तुम में है वही दूसरों में भी है। जब तक आपकी दयामेहर न हो तब तक हम इस अवस्था को पा नहीं सकते। आप दयालु हो, कृपालु हो और आप ही हम जैसे पापियों का उद्धार करने वाले हो। जो इंसान आपके नाम का सिमरन करता है वह हमेशा  के लिए आनंद को पा सकता है।उन्होंने आगे फ़रमाया कि इंसान दुनिया में पिता-परमेष्वर को पाने के लिए इधर-उधर भटकता रहता है और अनेक प्रकार के बाहरी साधन करता है लेकिन प्रभु को इन बाहरी साधनों से नहीं पाया जा सकता। सब कुछ हमारे अंदर है, बाहर कुछ भी नहीं, इसीलिए हमें अपना ध्यान बाहर से हटाकर अंदर की ओर करना होगा।उनके सत्संग को सुनने के लिए सिर्फ उल्हासनगर से ही नहीं बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में आए लोगों के अलावा विदेशी भाई-बहन भी उपस्थित थे।25 फरवरी की रात को ही इसी स्थान पर संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने नामदान अर्थात् आध्यात्मिक दीक्षा देकर अनेकों लोगों को प्रभु की ज्योति व श्रुति का निजानुभव प्रदान किया।संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ध्यान-अभ्यास की एक सरल विधि सिखाते हैं, जिसका अभ्यास स्त्री हो या पुरुष, बीमार हो या स्वस्थ, चाहे वह किसी भी उम्र व जाति का हो, कर सकता है। ध्यान-अभ्यास की यह विधि इनसे पहले हजूर बाबा सावन सिंह जी महाराज, परम संत कृपाल सिंह जी महाराज और दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज ने सिखाई। इस विधि को ‘सुरत शब्द योग’ व ‘आंतरिक ज्योति व श्रुति का मार्ग दर्शन’ भी कहा जाता है।सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह जी महाराज आज संपूर्ण विश्व में ध्यान-अभ्यास द्वारा प्रेम, एकता व शांति का संदेश प्रसारित कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें विभिन्न देशों द्वारा अनेक शांति पुरस्कारों व सम्मानों के साथ-साथ पाँच डॉक्टरेट की उपाधियों से भी सम्मानित किया जा चुका है।इस मिशन का साहित्य विश्व की 55 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। इसका मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, अमेरिका में स्थित है।

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