१०१ टोना-टोटका

बुद्धि और ज्ञान १. माघ मास की कृष्णपक्ष अष्टमी के दिन को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में अर्द्धरात्रि के समय रक्त चन्दन से अनार की कलम से “ॐ ह्वीं´´ को भोजपत्र पर लिख कर नित्य पूजा करने से अपार विद्या, बुद्धि की प्राप्ति होती है। 2॰ उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वच:। यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्न: सपत्नहा।। सपत्नक्षयणो वृषाभिराष्ट्रो विष सहि:। यथाहभेषां वीराणां विराजानि जनस्य च।। यह सूर्य ऊपर चला गया है, मेरा यह मन्त्र भी ऊपर गया है, ताकि मैं शत्रु को मारने वाला होऊँ। प्रतिद्वन्द्वी को नष्ट करने वाला, प्रजाओं की इच्छा को पूरा करने वाला, राष्ट्र को सामर्थ्य से प्राप्त करने वाला तथा जीतने वाला होऊँ, ताकि मैं शत्रु पक्ष के वीरों का तथा अपने एवं पराये लोगों का शासक बन सकूं। 21 रविवार तक सूर्य को नित्य रक्त पुष्प डाल कर अर्ध्य दिया जाता है। अर्ध्य द्वारा विसर्जित जल को दक्षिण नासिका, नेत्र, कर्ण व भुजा को स्पर्शित करें। प्रस्तुत मन्त्र `राष्ट्रवर्द्धन´ सूक्त से उद्धृत है। ३॰ बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो, बार-बार फेल हो जाते हों, तो यह सरल सा टोटका करें- शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाईयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। पीछे मुड़कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाएं। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें। यह उपाय माता-पिता भी अपने बच्चे के लिये कर सकते हैं। ४॰ श्री गोस्वामी तुलसीदास विरचित “अत्रिमुनि द्वारा श्रीराम स्तुति´´ का नित्य पाठ करें। निम्न छन्द अरण्यकाण्ड में वर्णित है। `मानस पीयूष´ के अनुसार यह `राम चरित मानस की नवीं स्तुति है और नक्षत्रों में नवाँ नक्षत्र आश्लेषा (नक्षत्र स्वामी-बुध) है। अत: जीवन में जिनको सर्वोच्च आसन पर जाने की कामना हो, वे इस स्तोत्र को भगवान् श्रीराम / रामायणी हनुमान के चित्र या मूर्ति के समक्ष बैठकर नित्य पढ़ें। ।।श्रीअत्रि-मुनिरूवाच।। नमामि भक्त-वत्सलं, कृपालु-शील-कोमलम्। भजामि ते पदाम्बुजं, अकामिनां स्व-धामदम्।।1 निकाम-श्याम-सुन्दरं, भवाम्बु-नाथ मन्दरम्। प्रफुल्ल-कंज-लोचनं, मदादि-दोष-मोचनम्।।2 प्रलम्ब-बाहु-विक्रमं, प्रभो•प्रमेय-वैभवम्। निषंग-चाप-सायकं, धरं त्रिलोक-नायकम्।।3 दिनेश-वंश-मण्डनम्, महेश-चाप-खण्डनम्। मुनीन्द्र-सन्त-रंजनम्, सुरारि-वृन्द-भंजनम्।।4 मनोज-वैरि-वन्दितं, अजादि-देव-सेवितम्। विशुद्ध-बोध-विग्रहं, समस्त-दूषणापहम्।।5 नमामि इन्दिरा-पतिं, सुखाकरं सतां गतिम्। भजे स-शक्ति सानुजं, शची-पति-प्रियानुजम्।।6 त्वदंघ्रि-मूलं ये नरा:, भजन्ति हीन-मत्सरा:। पतन्ति नो भवार्णवे, वितर्क-वीचि-संकुले।।7 विविक्त-वासिन: सदा, भजन्ति मुक्तये मुदा। निरस्य इन्द्रियादिकं, प्रयान्ति ते गतिं स्वकम्।।8 तमेकमद्भुतं प्रभुं, निरीहमीश्वरं विभुम्। जगद्-गुरूं च शाश्वतं, तुरीयमेव केवलम्।।9 भजामि भाव-वल्लभं, कु-योगिनां सु-दुलर्भम्। स्वभक्त-कल्प-पादपं, समं सु-सेव्यमन्हवम्।।10 अनूप-रूप-भूपतिं, नतोऽहमुर्विजा-पतिम्। प्रसीद मे नमामि ते, पदाब्ज-भक्तिं देहि मे।।11 पठन्ति से स्तवं इदं, नराऽऽदरेण ते पदम्। व्रजन्ति नात्र संशयं, त्वदीय-भक्ति-संयुता:।।12 हे भक्तवत्सल ! हे कृपालु ! हे कोमल स्वभाववाले ! मैं आपको नमस्कार करता हू¡। निष्काम पुरूषों को अपना परमधाम देनेवाले आपके चरणकमलों को मैं भजता हू¡। आप नितान्त सुन्दर श्याम, संसार (आवागमन) रूपी समुद्र को मथने के लिये मन्दराचल रूप, फूले हुए कमल के समान नेत्रों वाले और मद आदि दोषों से छुड़ाने वाले हैं। हे प्रभो ! आपकी लम्बी भुजाओं का पराक्रम और आपका ऐश्वर्य अप्रमेय (बुद्धि के परे) है। आप तरकस और धनुष-बाण धारण करने वाले तीनों लोकों के स्वामी हैं। सूर्यवंश के भूषण, महादेव जी के धनुष को तोड़ने वाले, मुनिराजों और सन्तों को आनन्द देने वाले तथा देवताओं के शत्रु असुरों के समूह का नाश करने वाले हैं। आप कामदेव के शत्रु महादेव जी के द्वारा वन्दित, ब्रह्मा आदि देवताओं से सेवित, विशुद्ध ज्ञानमय विग्रह और समस्त दोषों को नष्ट करने वाले हैं। हे लक्ष्मीपते ! हे सुखों की खान और सत्पुरूषों की एकमात्र गति ! मैं आपको नमस्कार करता हू¡। हे शचीपति (इन्द्र) के प्रिय छोटे भाई (वामनजी) ! शक्ति-स्वरूपा श्रीसीताजी और छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित आपको मैं भजता हू¡। जो मनुष्य मत्सर (डाह) रहित होकर आपके चरणकमलों का सेवन करते हैं, वे तर्क-वितर्क (अनेक प्रकार के सन्देह) रूपी तरंगों से पूर्ण संसार रूपी समुद्र में नहीं गिरते। जो एकान्तवासी पुरूष मुक्ति के लिये, इन्द्रियादि का निग्रह करके (उन्हें विषयों से हटाकर) प्रसन्नतापूर्वक आपको भजते हैं, वे स्वकीय गति को (अपने स्वरूप को) प्राप्त होते हैं। उन (आप) को जो एक (अद्वितीय), अद्भूत (मायिक जगत् में विलक्षण), प्रभु (सर्वसमर्थ), इच्छारहित, ईश्वर (सबके स्वामी), व्यापक, जगद्गुरू, सनातन (नित्य), तुरीय (तीनों गुणों से सर्वथा परे) और केवल (अपने स्वरूप में स्थित) हैं। (तथा) जो भावप्रिय, कुयोगियों (विषयी पुरूषों) के लिये अत्यन्त दुर्लभ, अपने भक्तों के लिये कल्पवृक्ष, सम और सदा सुखपूर्वक सेवन करने योग्य हैं, मैं निरन्तर भजता हू¡। हे अनुपम सुन्दर ! हे पृथ्वीपति ! हे जानकीनाथ ! मैं आपको प्रणाम करता हू¡। मुझपर प्रसन्न होइये, मैं आपको नमस्कार करता हू¡। मुझे अपने चरणकमलों की भक्ति दीजिये। जो मनुष्य इस स्तुति को आदरपूर्वक पढ़ते हैं, वे आपकी भक्ति से युक्त होकर आपके परमपद को प्राप्त होते हैं, इसमें सन्देह नहीं है। व्यापार वृधि के लिए १. यदि परिश्रम के पश्चात् भी कारोबार ठप्प हो, या धन आकर खर्च हो जाता हो तो यह टोटका काम में लें। किसी गुरू पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन प्रात: हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे “संकटनाशन गणेश स्तोत्र´´ के 11 पाठ करें। तत्पश्चात् इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रूपया या 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठ रख कर दाहिने मुख के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। गरीबों और ब्राह्मणों को दान करते रहे। आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार आएगा। 1 साल बाद नयी थैली बना कर बदलते रहें। 2॰ किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर “बटुक भैरव स्तोत्र´´ का एक पाठ कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी। 3॰ रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´। 4॰ सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की `कुशा´ की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें। 5॰ व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें- सरसों के तैल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें -“हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।´´ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें। 6॰ सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है। 7॰ किसी शनिवार को, यदि उस दिन `सर्वार्थ सिद्धि योग’ हो तो अति उत्तम सांयकाल अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रुपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और कामनाओं की पूर्ति होती है। 8॰ रविवार पुष्य नक्षत्र में एक कौआ अथवा काला कुत्ता पकड़े। उसके दाएँ पैर का नाखून काटें। इस नाखून को ताबीज में भरकर, धूपदीपादि से पूजन कर धारण करें। इससे आर्थिक बाधा दूर होती है। कौए या काले कुत्ते दोनों में से किसी एक का नाखून लें। दोनों का एक साथ प्रयोग न करें। 9॰ प्रत्येक प्रकार के संकट निवारण के लिये भगवान गणेश की मूर्ति पर कम से कम 21 दिन तक थोड़ी-थोड़ी जावित्री चढ़ावे और रात को सोते समय थोड़ी जावित्री खाकर सोवे। यह प्रयोग 21, 42, 64 या 84 दिनों तक करें। 10॰ अक्सर सुनने में आता है कि घर में कमाई तो बहुत है, किन्तु पैसा नहीं टिकता, तो यह प्रयोग करें। जब आटा पिसवाने जाते हैं तो उससे पहले थोड़े से गेंहू में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर मिला लें तथा अब इसको बाकी गेंहू में मिला कर पिसवा लें। यह क्रिया सोमवार और शनिवार को करें। फिर घर में धन की कमी नहीं रहेगी। 11॰ आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के लियें डाल दिया करें तथा केवल शनिवार को ही आटा पिसवाने का नियम बना लें। 12॰ शनिवार को खाने में किसी भी रूप में काला चना अवश्य ले लिया करें। 13॰ अगर पर्याप्त धर्नाजन के पश्चात् भी धन संचय नहीं हो रहा हो, तो काले कुत्ते को प्रत्येक शनिवार को कड़वे तेल (सरसों के तेल) से चुपड़ी रोटी खिलाएँ। 14॰ संध्या समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए, किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का क्षय होता है। 15॰ रात्रि में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है। अत: समृद्धि चाहने वालों को तथा जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात्रि भोज में नहीं करना चाहिये। 16॰ भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए। 17॰ सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी गौ, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें। 18॰ घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाये गये फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है। 19॰ अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है। 20॰ रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र हो, तब गूलर के वृक्ष की जड़ प्राप्त कर के घर लाएं। इसे धूप, दीप करके धन स्थान पर रख दें। यदि इसे धारण करना चाहें तो स्वर्ण ताबीज में भर कर धारण कर लें। जब तक यह ताबीज आपके पास रहेगी, तब तक कोई कमी नहीं आयेगी। घर में संतान सुख उत्तम रहेगा। यश की प्राप्ति होती रहेगी। धन संपदा भरपूर होंगे। सुख शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होगी। 21॰ `देव सखा´ आदि 18 पुत्रवर्ग भगवती लक्ष्मी के कहे गये हैं। इनके नाम के आदि में और अन्त में `नम:´ लगाकर जप करने से अभीष्ट धन की प्राप्ति होती है। यथा – ॐ देवसखाय नम:, चिक्लीताय, आनन्दाय, कर्दमाय, श्रीप्रदाय, जातवेदाय, अनुरागाय, सम्वादाय, विजयाय, वल्लभाय, मदाय, हर्षाय, बलाय, तेजसे, दमकाय, सलिलाय, गुग्गुलाय, ॐ कुरूण्टकाय नम:। 22॰ किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है। 23॰ किसी भी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय घर की देहली के बाहर, पूर्व दिशा की ओर, एक मुट्ठी घुघंची को रख कर अपना कार्य बोलते हुए, उस पर बलपूर्वक पैर रख कर, कार्य हेतु निकल जाएं, तो अवश्य ही कार्य में सफलता मिलती है। 24॰ अगर किसी काम से जाना हो, तो एक नींबू लें। उसपर 4 लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें : `ॐ श्री हनुमते नम:´। 21 बार जाप करने के बाद उसको साथ ले कर जाएं। काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। 25॰ चुटकी भर हींग अपने ऊपर से वार कर उत्तर दिशा में फेंक दें। प्रात:काल तीन हरी इलायची को दाएँ हाथ में रखकर “श्रीं श्रीं´´ बोलें, उसे खा लें, फिर बाहर जाए¡। 26॰ जिन व्यक्तियों को लाख प्रयत्न करने पर भी स्वयं का मकान न बन पा रहा हो, वे इस टोटके को अपनाएं। प्रत्येक शुक्रवार को नियम से किसी भूखे को भोजन कराएं और रविवार के दिन गाय को गुड़ खिलाएं। ऐसा नियमित करने से अपनी अचल सम्पति बनेगी या पैतृक सम्पति प्राप्त होगी। अगर सम्भव हो तो प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् निम्न मंत्र का जाप करें। “ॐ पद्मावती पद्म कुशी वज्रवज्रांपुशी प्रतिब भवंति भवंति।।´´ 27॰ यह प्रयोग नवरात्रि के दिनों में अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस दिन प्रात:काल उठ कर पूजा स्थल में गंगाजल, कुआं जल, बोरिंग जल में से जो उपलब्ध हो, उसके छींटे लगाएं, फिर एक पाटे के ऊपर दुर्गा जी के चित्र के सामने, पूर्व में मुंह करते हुए उस पर 5 ग्राम सिक्के रखें। साबुत सिक्कों पर रोली, लाल चन्दन एवं एक गुलाब का पुष्प चढ़ाएं। माता से प्रार्थना करें। इन सबको पोटली बांध कर अपने गल्ले, संदूक या अलमारी में रख दें। यह टोटका हर 6 माह बाद पुन: दोहराएं। 28॰ घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तरपश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा। 29॰ व्यक्ति को ऋण मुक्त कराने में यह टोटका अवश्य सहायता करेगा : मंगलवार को शिव मन्दिर में जा कर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम:´´ मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं। 30॰ जिन व्यक्तियों को निरन्तर कर्ज घेरे रहते हैं, उन्हें प्रतिदिन “ऋणमोचक मंगल स्तोत्र´´ का पाठ करना चाहिये। यह पाठ शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से शुरू करना चाहिये। यदि प्रतिदिन किसी कारण न कर सकें, तो प्रत्येक मंगलवार को अवश्य करना चाहिये। 31॰ सोमवार के दिन एक रूमाल, 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल तथा थोड़ा सा गुड़ लें। फिर किसी विष्णुण्लक्ष्मी जी के मिन्दर में जा कर मूर्त्ति के सामने रूमाल रख कर शेष वस्तुओं को हाथ में लेकर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए बारी-बारी इन वस्तुओं को उसमें डालते रहें। फिर इनको इकट्ठा कर के कहें की `मेरी परेशानियां दूर हो जाएं तथा मेरा कर्जा उतर जाए´। यह क्रिया आगामी 7 सोमवार और करें। कर्जा जल्दी उतर जाएगा तथा परेशानियां भी दूर हो जाएंगी। 32॰ सर्वप्रथम 5 लाल गुलाब के पूर्ण खिले हुए फूल लें। इसके पश्चात् डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा ले कर अपने सामने बिछा लें। इन पांचों गुलाब के फुलों को उसमें, गायत्री मंत्र 21 बार पढ़ते हुए बांध दें। अब स्वयं जा कर इन्हें जल में प्रवाहित कर दें। भगवान ने चाहा तो जल्दी ही कर्ज से मुक्ति प्राप्त होगी। 34॰ कर्ज-मुक्ति के लिये “गजेन्द्र-मोक्ष´´ स्तोत्र का प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व पाठ अमोघ उपाय है। 35॰ घर में स्थायी सुख-समृद्धि हेतु पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े रह कर लोहे के बर्तन में जल, चीनी, घी तथा दूध मिला कर पीपल के वृक्ष की जड़ में डालने से घर में लम्बे समय तक सुख-समृद्धि रहती है और लक्ष्मी का वास होता है। 33॰ अगर निरन्तर कर्ज में फँसते जा रहे हों, तो श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह 6 शनिवार किया जाए, तो आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त होते हैं। 36॰ घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तों वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए की `भविष्य में घर में धन हानि का सामना न करना पड़े´। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए। 37॰ काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी। 38॰ घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें। कुत्ते को दूध दें। अपने कमरे में मोर का पंख रखें। 39॰ अगर आप सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो आपको पके हुए मिट्टी के घड़े को लाल रंग से रंगकर, उसके मुख पर मोली बांधकर तथा उसमें जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। 40॰ अखंडित भोज पत्र पर 15 का यंत्र लाल चन्दन की स्याही से मोर के पंख की कलम से बनाएं और उसे सदा अपने पास रखें। 41॰ व्यक्ति जब उन्नति की ओर अग्रसर होता है, तो उसकी उन्नति से ईर्ष्याग्रस्त होकर कुछ उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने के स्थान पर वे ही उसकी उन्नति के मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं, ऐसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसी ही परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रात:काल सात बार हनुमान बाण का पाठ करें तथा हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाए¡ और पाँच लौंग पूजा स्थान में देशी कर्पूर के साथ जलाएँ। फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाए¡। यह प्रयोग आपके जीवन में समस्त शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होगा, वहीं इस यंत्र के माध्यम से आप अपनी मनोकामनाओं की भी पूर्ति करने में सक्षम होंगे। 42॰ कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा। 43॰ अगर अचानक धन लाभ की स्थितियाँ बन रही हो, किन्तु लाभ नहीं मिल रहा हो, तो गोपी चन्दन की नौ डलियाँ लेकर केले के वृक्ष पर टाँग देनी चाहिए। स्मरण रहे यह चन्दन पीले धागे से ही बाँधना है। 44॰ अकस्मात् धन लाभ के लिये शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाना चाहिए। यदि व्यवसाय में आकिस्मक व्यवधान एवं पतन की सम्भावना प्रबल हो रही हो, तो यह प्रयोग बहुत लाभदायक है। 45॰ अगर आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों, तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) लगा दें। 46॰ अगर आप अमावस्या के दिन पीला त्रिकोण आकृति की पताका विष्णु मन्दिर में ऊँचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएँ कि वह लहराता हुआ रहे, तो आपका भाग्य शीघ्र ही चमक उठेगा। झंडा लगातार वहाँ लगा रहना चाहिए। यह अनिवार्य शर्त है। 47॰ देवी लक्ष्मी के चित्र के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाए¡। उसी दिन धन लाभ होगा। 48॰ एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मोली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएँ। धन लाभ होगा। 49॰ पीपल के वृक्ष की जड़ में तेल का दीपक जला दें। फिर वापस घर आ जाएँ एवं पीछे मुड़कर न देखें। धन लाभ होगा। 50॰ प्रात:काल पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएँ तथा अपनी सफलता की मनोकामना करें और घर से बाहर शुद्ध केसर से स्वस्तिक बनाकर उस पर पीले पुष्प और अक्षत चढ़ाए¡। घर से बाहर निकलते समय दाहिना पाँव पहले बाहर निकालें। 51॰ एक हंडिया में सवा किलो हरी साबुत मूंग की दाल, दूसरी में सवा किलो डलिया वाला नमक भर दें। यह दोनों हंडिया घर में कहीं रख दें। यह क्रिया बुधवार को करें। घर में धन आना शुरू हो जाएगा। 52॰ प्रत्येक मंगलवार को 11 पीपल के पत्ते लें। उनको गंगाजल से अच्छी तरह धोकर लाल चन्दन से हर पत्ते पर 7 बार राम लिखें। इसके बाद हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं तथा वहां प्रसाद बाटें और इस मंत्र का जाप जितना कर सकते हो करें। `जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरू देव की नांई´ 7 मंगलवार लगातार जप करें। प्रयोग गोपनीय रखें। अवश्य लाभ होगा। 53॰ अगर नौकरी में तरक्की चाहते हैं, तो 7 तरह का अनाज चिड़ियों को डालें। 54॰ ऋग्वेद (4/32/20-21) का प्रसिद्ध मन्त्र इस प्रकार है – `ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।´ (हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं। आप्तजनों से सुना है कि संसारभर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं – उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान मुझे इस अर्थ संकट से मुक्त कर दो।) 51॰ निम्न मन्त्र को शुभमुहूर्त्त में प्रारम्भ करें। प्रतिदिन नियमपूर्वक 5 माला श्रद्धा से भगवान् श्रीकृष्ण का ध्यान करके, जप करता रहे – “ॐ क्लीं नन्दादि गोकुलत्राता दाता दारिद्र्यभंजन। सर्वमंगलदाता च सर्वकाम प्रदायक:। श्रीकृष्णाय नम:।।´´ 52॰ भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष भरणी नक्षत्र के दिन चार घड़ों में पानी भरकर किसी एकान्त कमरे में रख दें। अगले दिन जिस घड़े का पानी कुछ कम हो उसे अन्न से भरकर प्रतिदिन विधिवत पूजन करते रहें। शेष घड़ों के पानी को घर, आँगन, खेत आदि में छिड़क दें। अन्नपूर्णा देवी सदैव प्रसन्न रहेगीं। 53॰ किसी शुभ कार्य के जाने से पहले – रविवार को पान का पत्ता साथ रखकर जायें। सोमवार को दर्पण में अपना चेहरा देखकर जायें। मंगलवार को मिष्ठान खाकर जायें। बुधवार को हरे धनिये के पत्ते खाकर जायें। गुरूवार को सरसों के कुछ दाने मुख में डालकर जायें। शुक्रवार को दही खाकर जायें। शनिवार को अदरक और घी खाकर जाना चाहिये। 54॰ किसी भी शनिवार की शाम को माह की दाल के दाने लें। उसपर थोड़ी सी दही और सिन्दूर लगाकर पीपल के वृक्ष के नीचे रख दें और बिना मुड़कर देखे वापिस आ जायें। सात शनिवार लगातार करने से आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली बनी रहेगी। स्वास्थ्य के लिये टोटके 1॰ सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है। 2॰ हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर “ॐ नम: शिवाय´´ बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें। 3॰ जिन लोगों को 1-2 बार दिल का दौरा पहले भी पड़ चुका हो वे उपरोक्त प्रयोग संख्या 2 करें तथा निम्न प्रयोग भी करें :- एक पाचंमुखी रूद्राक्ष, एक लाल रंग का हकीक, 7 साबुत (डंठल सहित) लाल मिर्च को, आधा गज लाल कपड़े में रख कर व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उसार कर इसे किसी नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर दें। 4॰ किसी भी सोमवार से यह प्रयोग करें। बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा कप पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी को पी जाएं। जिस पात्र में पानी पीएं, उसे उल्टा कर के रख दें। कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे। 5॰ घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है। 6॰ रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है। 7॰ पूर्णिमा के दिन चांदनी में खीर बनाएं। ठंडी होने पर चन्द्रमा और अपने पितरों को भोग लगाएं। कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। वर्ष भर पूर्णिमा पर ऐसा करते रहने से गृह क्लेश, बीमारी तथा व्यापार हानि से मुक्ति मिलती है। 8॰ रोग मुक्ति के लिए प्रतिदिन अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को तथा चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं। 9॰ घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं। 10॰ पुत्र बीमार हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं। पीपल के पेड़ की लकड़ी सिरहाने रखें। 11॰ पत्नी बीमार हो तो गोदान करें। जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखशल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है। 12॰ मंदिर में गुप्त दान करें। 13॰ रविवार के दिन बूंदी के सवा किलो लड्डू मंदिर में प्रसाद के रूप में बांटे। 14॰ सदैव पूर्व या दक्षिण दिषा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है। 15॰ अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर टोटके की अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए। 16॰ अमावस्या को प्रात: मेंहदी का दीपक पानी मिला कर बनाएं। तेल का चौमुंहा दीपक बना कर 7 उड़द के दाने, कुछ सिन्दूर, 2 बूंद दही डाल कर 1 नींबू की दो फांकें शिवजी या भैरों जी के चित्र का पूजन कर, जला दें। महामृत्युजंय मंत्र की एक माला या बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ कर रोग-शोक दूर करने की भगवान से प्रार्थना कर, घर के दक्षिण की ओर दूर सूखे कुएं में नींबू सहित डाल दें। पीछे मुड़कर नहीं देखें। उस दिन एक ब्राह्मण -ब्राह्मणी को भोजन करा कर वस्त्रादि का दान भी कर दें। कुछ दिन तक पक्षियों, पशुओं और रोगियों की सेवा तथा दान-पुण्य भी करते रहें। इससे घर की बीमारी, भूत बाधा, मानसिक अशांति निश्चय ही दूर होती है। 17॰ किसी पुरानी मूर्ति के ऊपर घास उगी हो तो शनिवार को मूर्ति का पूजन करके, प्रात: उसे घर ले आएं। उसे छाया में सुखा लें। जिस कमरे में रोगी सोता हो, उसमें इस घास में कुछ धूप मिला कर किसी भगवान के चित्र के आगे अग्नि पर सांय, धूप की तरह जलाएं और मन्त्र विधि से ´´ ॐ माधवाय नम:। ॐ अनंताय नम:। ॐ अच्युताय नम:।´´ मन्त्र की एक माला का जाप करें। कुछ दिन में रोगी स्वस्थ हो जायेगा। दान-धर्म और दवा उपयोग अवश्य करें। इससे दवा का प्रभाव बढ़ जायेगा। 18॰ अगर बीमार व्यक्ति ज्यादा गम्भीर हो, तो जौ का 125 पाव (सवा पाव) आटा लें। उसमें साबुत काले तिल मिला कर रोटी बनाएं। अच्छी तरह सेंके, जिससे वे कच्ची न रहें। फिर उस पर थोड़ा सा तिल्ली का तेल और गुड़ डाल कर पेड़ा बनाएं और एक तरफ लगा दें। फिर उस रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7 बार वार कर किसी भैंसे को खिला दें। पीछे मुड़ कर न देखें और न कोई आवाज लगाए। भैंसा कहाँ मिलेगा, इसका पता पहले ही मालूम कर के रखें। भैंस को रोटी नहीं खिलानी है, केवल भैंसे को ही श्रेष्ठ रहती है। शनि और मंगलवार को ही यह कार्य करें। 19॰ पीपल के वृक्ष को प्रात: 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा। 20॰ किसी कब्र या दरगाह पर सूर्यास्त के पश्चात् तेल का दीपक जलाएं। अगरबत्ती जलाएं और बताशे रखें, फिर वापस मुड़ कर न देखें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा। 21॰ किसी तालाब, कूप या समुद्र में जहां मछलियाँ हों, उनको शुक्रवार से शुक्रवार तक आटे की गोलियां, शक्कर मिला कर, चुगावें। प्रतिदिन लगभग 125 ग्राम गोलियां होनी चाहिए। रोगी ठीक होता चला जायेगा। 22॰ शुक्रवार रात को मुठ्ठी भर काले साबुत चने भिगोयें। शनिवार की शाम काले कपड़े में उन्हें बांधे तथा एक कील और एक काले कोयले का टुकड़ा रखें। इस पोटली को किसी तालाब या कुएं में फेंक दें। फेंकने से पहले रोगी के ऊपर से 7 बार वार दें। ऐसा 3 शनिवार करें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा। 23॰ सवा सेर (1॰25 सेर) गुलगुले बाजार से खरीदें। उनको रोगी पर से 7 बार वार कर चीलों को खिलाएं। अगर चीलें सारे गुलगुले, या आधे से ज्यादा खा लें तो रोगी ठीक हो जायेगा। यह कार्य शनि या मंगलवार को ही शाम को 4 और 6 के मध्य में करें। गुलगुले ले जाने वाले व्यक्ति को कोई टोके नहीं और न ही वह पीछे मुड़ कर देखे। 24॰ यदि लगे कि शरीर में कष्ट समाप्त नहीं हो रहा है, तो थोड़ा सा गंगाजल नहाने वाली बाल्टी में डाल कर नहाएं। 25॰ प्रतिदिन या शनिवार को खेजड़ी की पूजा कर उसे सींचने से रोगी को दवा लगनी शुरू हो जाती है और उसे धीरे-धीरे आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा। यदि प्रतिदिन सींचें तो 1 माह तक और केवल शनिवार को सींचें तो 7 शनिवार तक यह कार्य करें। खेजड़ी के नीचे गूगल का धूप और तेल का दीपक जलाएं। 26॰ हर मंगल और शनिवार को रोगी के ऊपर से इमरती को 7 बार वार कर कुत्तों को खिलाने से धीरे-धीरे आराम मिलता है। यह कार्य कम से कम 7 सप्ताह करना चाहिये। बीच में रूकावट न हो, अन्यथा वापस शुरू करना होगा। 27॰ साबुत मसूर, काले उड़द, मूंग और ज्वार चारों बराबर-बराबर ले कर साफ कर के मिला दें। कुल वजन 1 किलो हो। इसको रोगी के ऊपर से 7 बार वार कर उनको एक साथ पकाएं। जब चारों अनाज पूरी तरह पक जाएं, तब उसमें तेल-गुड़ मिला कर, किसी मिट्टी के दीये में डाल कर दोपहर को, किसी चौराहे पर रख दें। उसके साथ मिट्टी का दीया तेल से भर कर जलाएं, अगरबत्ती जलाएं। फिर पानी से उसके चारों ओर घेरा बना दें। पीछे मुड़ कर न देखें। घर आकर पांव धो लें। रोगी ठीक होना शुरू हो जायेगा। 28॰ गाय के गोबर का कण्डा और जली हुई लकड़ी की राख को पानी में गूंद कर एक गोला बनाएं। इसमें एक कील तथा एक सिक्का भी खोंस दें। इसके ऊपर रोली और काजल से 7 निशान लगाएं। इस गोले को एक उपले पर रख कर रोगी के ऊपर से 3 बार उतार कर सुर्यास्त के समय मौन रह कर चौराहे पर रखें। पीछे मुड़ कर न देखें। 29॰ शनिवार के दिन दोपहर को 2॰25 (सवा दो) किलो बाजरे का दलिया पकाएं और उसमें थोड़ा सा गुड़ मिला कर एक मिट्टी की हांडी में रखें। सूर्यास्त के समय उस हांडी को रोगी के शरीर पर बायें से दांये 7 बार फिराएं और चौराहे पर मौन रह कर रख आएं। आते-जाते समय पीछे मुड़ कर न देखें और न ही किसी से बातें करें। 30॰ धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें। 31॰ सरसों के तेल को गरम कर इसमें एक चमड़े का टुकड़ा डालें, पुन: गर्म कर इसमें नींबू, फिटकरी, कील और काली कांच की चूड़ी डाल कर मिट्टी के बर्तन में रख कर, रोगी के सिर पर फिराएं। इस बर्तन को जंगल में एकांत में गाड़ दें। 32॰ घर से बीमारी जाने का नाम न ले रही हो, किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र ले कर उसे हांडी में पिरो कर रोगी के पलंग के पाये पर बांधने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलता है। उस दिन से रोग समाप्त होना शुरू हो जाता है। 33॰ यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोग-पीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बार-बार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर भी शांत हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहू¡ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। गेहूँ का दान जरूरतमंद एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों को ही करना चाहिए। नोट:- कोई भी उपाए या टोटका बिना गुरु की अगज्ञ या साधक के परामर्श के बिना ना करे आप हमें इ मेल द्वारा अपना जन्म समय तिथि बता कर ये सब पूछ सकते है! जैगुरुदेव टोटका MAY 17 2010 Black Magic/ काला जादू / टोना Arun Nayer Arun Nayer • Black Magic • Mantra • Tantra • Tona • काला जादू • टोटके • टोना • तंत्र • मंत्र सदियों के दौरान, जादू का सबसे तत्वों को निर्दिष्ट किया गया है के रूप में काले रंग का जादू या बुरी रूपों जादू.. इस गलतफहमी आम है, जादू का सबसे तत्वों और अपनी समझ के रूप में ऊर्जा का अच्छा तत्व .. पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं काला कला और एक उलझन जादूगर या टोने से एक निजी पहलू है .. सब जादू या चलानेवाले कि जानबूझकर अंत में एक होगा wielder चोट करना, अंत में नुकसान दुसरे को शारीरिक या मानसिक चोट पहुचना होता है! काला जादू क्या है? पहले सब काले जादू या बुरा जादू कर राशि जाने के रूप में कुछ यह बहुत से लोग भी वहाँ रहती है, लोगों के साथ छेड़खानी, लालच छेड़खानी, एक नकारात्मक रास्ता है जो स्वयं ही .. लाभ में ऊर्जा को नियंत्रित करने भर जाने बिना जादू के लिए इस प्रपत्र कर रहे हैं अगर हम बेहतर ऊर्जा हेरफेर के इन रूपों को समझ सकता हूँ या तो जीवन के इस आम पहलू से खुद को बचाने के आसान नियंत्रण. गलत समझा काला जादू का एक उदाहरण — काला जादू का एक अच्छा उदाहरण ऊर्जा के किसी भी रूप, कि नकारात्मक अपनी सेहत या बिजली प्रभाव से (आंतरिक स्वतंत्रता) .. विकल्प बनाना है यह अपने बॉस के साथ काम करने पर एक प्रभाव है जहाँ तुम इतने के लिए उपयोग किया जाता है हो सकता है कहा जा रहा है कि तुम क्या करने के लिए कर रहे हैं कि यह क्या तुम .. के लिए कर रहा है के अनजान यह बात जहाँ पैसा अपने जीवन और भावनात्मक दूसरों की प्रतिक्रिया हो जाता है .. कोई अस्तित्व ही नहीं हो सकता है पैसे का पीछा करते हुए एक अन्य उदाहरण के संबंध में एक अपमानजनक हो सकता है, जहां एक भागीदार दूसरे, यह कुछ और है भावनात्मक काला जादू .. साथ नहीं भ्रमित कर चोट पहुँचाने से बाहर खुशी हो जाता है यह काला जादू उपयोगकर्ता के पास वापस आता है अब जब कि मैं एक कुछ उदाहरण मैं बताता हूँ यह अंततः क्यों नकारात्मक विएल्डर नकारात्मक या काले जादू .. के साथ जो tampers असर होगा नाम है क्या आइंस्टीन ने कहा कि हर कदम एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया यह ऊर्जा के साथ ऐसी ही है .. हकदार को इसी तरह के यदि आप और ले ले और यह नकारात्मक का उपयोग कर रखने के लिए, यह आप और प्रभाव के बारे में वापसी करेंगे विनाशकारी हो सकता है .. यह आपको निराश या आत्महत्या या यहाँ तक कि कैंसर के कारण कुछ .. नाम कर सकते हैं यह सुनिश्चित करें कि ऊर्जा है, जो हम सब के अलावा है हमेशा सकारात्मक रहे है, उस तरह के सभी उपयोग करना ही अधिक .. लौट सकते सकारात्मक महत्वपूर्ण है काला जादू के शिकार – रक्षा स्वयं ही! यह दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष शिकार है, अगर आप ऊर्जा या नुकसान के शिकार हैं यह काला जादू करने के लिए अपने आप को अपनी ऊर्जा के साथ .. बचाव की कोशिश जरूरी है सकारात्मक हो और उन है कि ऊर्जा के स्तर के पास से भारी मात्रा में सलाह ले, तो हमारे चारों तरफ अच्छा जादू प्रयोक्ताओं के बहुत सारे हैं, जो नहीं जानता कि वे अच्छे के लिए फिराना या ऊर्जा का भी नहीं जानते होंगे, लेकिन हमेशा से मदद करने को तैयार हैं .. एक बार जब आप सलाह है या आप wielder की पहचान करने और उन्हें भावनात्मक सुरक्षा .. के साथ सामना मदद की ज़रूरत है तुम उन्हें काला जादू के बारे में नहीं पूछा के रूप में सबसे अधिक पसंद है क्या होगा सकते हैं .. लेकिन आप उन्हें बता सकते हैं कि वे कैसे कर आपको लगता है और फिर कहते हैं कि तुम मुझे इस तरह से कभी नहीं फिर से लागू होगा और मजबूत हो .. कभी कभी चलते दूर मदद लेकिन आप इन ऊर्जा के रूप में वे एक ऊर्जा निशान छोड़ है कि आप महीने के लिए .. चोट कर सकते पहली नशेड़ी सामना करना चाहिए कर सकते हैं कभी कभी काला जादू wielders कि उन्हें लगता है कि वे आसानी से नियंत्रण या जो पीढ़ी अच्छे हो सकते हैं! टोना जागे भूत भागेदीपावली की मध्य रात्रि में टोना जगाने की प्रथा आज भी प्रचलित है. उसी दिन गांव के बाहर एकान्त स्थान पर स्त्री निर्वसन होकर टोना सीखती, सिद्ध करती और ताजा करती है. सिद्धि की प्रक्रिया में सात सुई और डोरा प्रयोग में लाया जाता है. स्त्री टोने का पहला मन्त्र पढ़कर रात्रि के घोर अन्धकार में सुई के सूराख में डोरा डालती है. दूसरा मन्त्र पढ़कर अपने इष्ट देवी-देवता या पिशाच का आवाहन करती है. जब उस पर इष्ट का पूर्ण `आसेव’ हो जाता है तो वह तीसरा मन्त्र पढ़कर सुई को अपने गुप्तांग में प्रवेश कराती है. मन्त्र के प्रभाव और इष्ट की कृपा से जब सातों सुइयां बिना किसी प्रकार की पीड़ा और रक्तस्रराव के प्रवेश कर जाती हैं तो टोना सिद्ध हो जाता है. टोना सिद्ध हो जाने के बाद वह स्त्री डोरे की सहायता से, सातों सुइयों को एक-एक कर निकाल लेती है. टोना सिद्ध करने के बीच, अगर कोई व्यवधान, पीड़ा या रक्तस्राव हो तो टोना असफल समझा जाता है फिर उसे सारी प्रक्रियाएं पुन करनी पड़ती हैं. टोने का मंत्र सिद्ध कर लेने पर वह स्त्री निविड़ अंधकार में अपने इष्ट देवी-देवता और पिशाच को विशिष्ट आवाज में एकबार पूरी शक्ति के साथ चित्कारती हुई किसी भी दिशा में दौड़ पड़ती है. उस वक्त ऐसा लगता है कि जैसे उसके भीतर कोई अति मानवी शक्ति आ गयी हो और वह उस विक्षिप्तावस्था में लाल आंखों, बिखरे बालों के कारण दानवी बन गयी हो. कहते हैं जब वह चिल्लाकर दोड़ रही होती है, उस समय साहस कर अगर कोई उसके केश पकड़ लेले, तो वह स्त्री उसके वश में हो जाती है. टोना करके प्रेम बढ़ावें टोना जानने वाली स्त्री तीन स्थितियों में टोने का मंत्र मारती है– अपमान, ईर्ष्या और प्रेम में. लेकिन किसी भी स्थिति में वह पहल नहीं करती जब तक उसे छेड़ा न जाय. प्रेम-प्रंसग में वह टोना करके अपने प्रेमी के चित्र पर सर्प बैठाल देती है. वह सर्प वास्तव में उसी का प्रतिरूप होता है. टोने का वशीभूत पुरुष जब भी किसी रूपवती स्त्री या अपनी विवाहिता को देखता है, तो वह भी उसी टोनहिन स्त्री सदृश दीखती है. टोने का वशीकरण बहुत ही प्रभावशाली और भंयकर होता है. वशीकरण में बंधे व्यक्ति को जब घरवाले मुक्त कराने का प्रयास करते हैं तो टोनहिन भरसक अपने मंत्र के प्रभाव को अपने प्रेमी पर बनाये रखने की चेष्टा करती है. विफल होने पर वह प्रतिशोध की भावना से प्रेमी के चित्र पर बैठे मंत्र रूपी सर्प से प्रेमी को डंसाती है. इस प्रकार डंसा व्यक्ति फिर सामान्य व्यक्ति के रूप में जीवित नहीं रह पाता है. टोनहिन मारे टोना, औझा करे औझाई जब टोनहिन के होने की बात प्रमाणित हो जाती है तो उस स्त्री के सामने दो ही विकल्प होते हैं या तो वह टोना खींच ले या कठोर दण्ड भोगे. टोनहिन होने के सन्देह में कभी-कभी निर्दोष स्त्री भी दण्ड पा जाती है. आदिवासी समाज में ओझा और बैगा का निर्णय अन्तिम होता है तथा टोनहिन के लिए इनके यहां दण्ड-विधान अनिवार्य होता है. पिछले दिनों सहसा ऐसी ही एक क्रूर और रोमांचकारी घटना का किसी गाँव में पता चला था. बताया जाता है कि एक व्यक्ति कई वर्षों से बीमार चला आ रहा था. दवादारू से असफल हो वह ओझा के पास गया. औझा ने उसकी बीमारी का कारण उसी गांव की उजरिया नामक स्त्री के टोने का प्रभाव बताया. उजरिया उसी गांव की लगभग साठ वर्षीया बियार जाति की स्त्री थी. नाई उसके घर गया. उजरिया को एकान्त में ले जाकर विनती की–`दाई, अपना टोना खींच ले. कोई गलती हो गयी हो तो क्षमा कर. मैं तेरी और तेरी इस देवी की हर मनसा-मांग पूर्ण करूंगा.’ उजरिया ने अपना वक्ष दिखाकर उसे विश्वास दिलाना चाहा कि उसके प्रति उसका सन्देह गलत है. इससे नाई संतुष्ट नहीं हुआ. नाई ने एक रात अपने क्षेत्र के कई ओझाओं का अपने घर जुटान किया. उजरिया बुलवायी गयी. ओझाओं के मंत्र-प्रभाव से उजरिया के सिर पर देवी की असवारी आयी. वह हबुवाने लगी. देवी ने उजरिया की ही टोनहिन बताया. देवी के शान्त होने पर ओझाओं ने उजरिया को टोना खींच लेने के लिए कुछ और समय दिया. समय गुजर गया लेकिन नाई ठीक नहीं हुआ. नाई ने पुन: एक रात गांव तथा आसपास के ओझाओं बुलाया! उजरिया फिर बुलवायी गयी. जब वह उनके बीच आकर बैठी तो प्रधान औझा ने उसका अपराध बताया–`उजरिया, तूने देवी की बात को झुठलाया है और ओझा के आदेश की अवमानना की है, अत: तुझे अपने इस अपराध-कर्म के लिए `विष-दण्ड भोगना होगा. उजरिया नतमस्तक बैठी रही. उसकी मांग मूड़ दी गयी. मांग में घाव कर रक्त निकाला गया. पीछे से केश काट लिये गये. जिव्हा, मुख पर और जाघों के बीच में भी घाव कर के रक्त निकाला गया. औरत के महीने का कपड़ा पानी में भिगो कर एक कोरे मिट्टी के कटोरे में निचोड़ कर उपयुर्क्त तीनों स्थानों का रक्त मिलाकर उसमें उजरिया से थुकवाया गया. इस जहर के कटोरे को उज रिया के हाथ में देकर प्रधान ओझा ने आदेश दिया–`पी जा.’ उजरिया उस विष को पी गयी और उसी क्षण उजरिया के टोने के विष का प्रभाव हमेशा के लिए खत्म हो गया. नाई के घर से विष पीकर निकली उजरिया उस रात के अंधेरे में कहां गायब हो गयी यह आज तक किसी को भी मालूम न हो सका. टोटका : नंगे नाचे पानी बरसे टोना शत्रु के अनिष्ट के लिए किया जाता है, जब कि टोटका अपने हित के लिए ही किया जाता है. जब किसी को लड़का पैदा नहीं होता या पैदा होकर मर जाता है, कोई अधिक दिन तक बीमार रहता है, किसी का प्रेमी या प्रेमिका रूठ जाती है, किसी के व्यापार या कमाई में वृद्धि नहीं होती–भूत-प्रेत की बाधा रहती है, तो टोटका करके ठीक किया जाता है. टोटका प्राय: रवि, मंगल या शनिवार को किया जाता है. दीपावली के दिन टोटका का विशेष महत्व होता है. उसी दिन `वान मारा’ जाता है. मन्त्र जगाया जाता है तथा अपने इष्ट को सिद्ध किया जाता है. विश्वास है कि रवि या मंगलवार को उड़द की दाल की खिचड़ी पका कर काले कुत्ते को खिलाने से पुत्र की प्राप्ति होती है. अकाल होने पर गांव की स्त्रियां समुह में नंगी होकर सूखे खेत में हल जोतती हैं और नाचती हैं तो वर्षा होती और अच्छी पैदावार हो जाती है. भोर में उठकर किसी चौराहे पर दीपक जलाकर सिन्दूर पोतकर कच्चा डोरा चढ़ाकर पूजा करने से प्रेत-बाधा समाप्त हो जाती है. प्राय: जो व्यक्ति सर्वप्रथम उसे लांघता है प्रेत-बाधा उसके पास चली जाती है. इसे दूसरे शब्दों में `थोपना’ कहा जाता है. कभी-कभी बरगद या पीपल के वृक्ष में कच्चा डोरा बांधकर भी टोटका किया जाता है. कुंआ तालाब या नदी के तट पर दीपक जलाकर या जल में दीप-दान करके भी अपने घर आयी बाधा दूसरे पर थोपी जाती है. कुछ घरेलू टोटके जो अमूमन इस्तेमाल किये जाते हैं, जैसे:– बच्चे का रोना बन्द करना– सरसों, मिर्च (लाल) लोहबान तथा नमक लेकर बच्चे को ओइछना तथा उन वस्तुओं को आग में जलाना. बुखार से मुक्ति के लिए रोगी की लम्बाई के बराबर कच्चा घागा बरियार के पेड़ में बांधना तथा एक टोड़ा नमक वहीं रख देना. तीन दिन पर बुखार आने पर नमक लेकर किसी कपड़े में रख कर नाड़ी में बांध देना. चौथिया बुखार में गुड़ और सांप का केचुल भांग में मिलाकर बांह में बांधना. पलई के दर्द के लिए अमावस का काजल लेकर पलई में दोनों ओर टीका देना. अधकपारी में सूर्य को चलनी दिखाना, रोगी को चलनी के पानी से ओइछना तथा पुन: उस पानी को चलनी में से पार करके लोढ़ा से ओइछना. अनेक टोटके लोगों के बीच भी देखे जाते हैं. बच्चों को दिठौना इसका उदाहरण है. मंत्र देवी–वाक्य और तंत्र? मान्यता है कि टोना सिद्ध करना मंच सिद्ध करने की अपेक्षा कठिन होता है. मंत्र को पढ़ उसे फेंका जाता है जबकि टोना केवल संकेत मात्र से काम कर जाता है. मंत्र को सिद्ध करने के लिए भेड़, बकरा, मुर्गी, मुर्गा और शराबकी आवश्यकता पड़ती है. टोना सिद्ध करने के लिए गिरगिट, बिल्ली, बछिया और आदमियों के मल-मूत्र की. मंत्र झाड़ने का यंत्र कुत्थी, राख और बाना होता है. टोना केवल करइन और झाडू, से ही झाड़ा जाता है. मंत्र क्या हैं? पूछने पर मिसिर माझी-गांव के सिद्ध गुरु बलिकरन ने बताया–`मंत्र देवी–वाक्य है जिसमें बेधने की शक्ति होती है. मंत्र देवी के प्रसन्न होने पर, उनकी कृपा से प्राप्त होता है. गुरु ने मंत्र के विषय में कुछ और अधिक बताने के लिए एक पाव शराब की मांग की. शराब पीकर भगवती के धाम पर बैठकर उसने बताया कार्तिक से वैशाख तक शाम को मंत्र पढ़ता हूँ. चेले मंत्र को इसी धाम के इर्दगिर्द बैठकर सिद्ध करते हैं. मंत्र सिद्ध करने को `हबुआना’ कहते हैं. हबुआना अर्थात् मंत्र को इस तेजी के साथ पढ़ना कि मन्त्र के शब्द स्पष्ट मालूम न पड़े. धाम पर रखे बाने को अपने शरीर में बेधकर शिष्य मन्त्र के सिद्ध हो जाने का प्रमाण देता है. शरीर में बाना बेधने से अगर पीड़ी अनुभव हो और रक्त निकल आये तो सिद्धि असफल है. अपने ही शरीर में नहीं, दूसरे के शरीर में भी बेधकर अपने मन्त्र के पूर्ण सिद्ध हो जाने का प्रमाण देना पड़ता है. अगर मन्त्र सिद्ध है तो दूसरे के शरीर में भी बाना बेधने से पीड़ा नहीं होती, रक्त नहीं निकलता मन्त्र इस प्रकार है:– `शिवरतन गुरु, उदराज गुरू, मनहार गुरु, गुलाल गुरु, कौनर गुरुवाइना, माले पाठ बहिया आयो, गुन गंवारी, बात हमारी, हम हई मोहनी भारी, बारह मनकश् शंकर देयी घुमायी. बड़बड़ भूतन मार गिरायी. छोटे-मोटे करीं अहारा. जै दिन निर्मल भूत न मिले, तै दिन करीं उपवास, काली कंडरे छोड़े बान, कुल-कुल-कुल-कुल कालीचरै, बावन विघाकेइ भलाई, तवन काली आय गढ़, गुरु दोहाई महादेव दोहाई, छत्तीसों कोटी देवता कश्दोहाई.’ उपर्युक्त मन्त्र सिद्ध हो जाने पर जिस मन्त्र को पढ़कर ओझा बैगा, सोखा दुरात्मा और उसके टोने का नाश किया करते हैं, वह मन्त्र नीचे दिया जा रहा है. इस मन्त्र से कुछ आत्माओं के नाम और टोने के किस्म की जानकारी होती है–`रैमल गुरु, गुसैमल गुरू, सदई गुरु, सहास गुरु, अंधी गुरु, गाजना गुरू, जाधन गुरू, जगदम्बा गुरू, जाता गुरू, खंजनी गुरु, मंजनी गुरु, दोहाई गुरू नरसिंह की. अरघाबांधी, परदा बांधी, तीन खूट के भूत के बान्हें, गुरू बान्हें गुरु भाई बान्हें, गुरुक चेला बान्हें, धरती डोले, पृथ्वी डोले, गुरुका बान्हा ना छूटे, दोहाई गुरु नरसिंह क. बान्हीं आदि तमसान बान्हीं, काल गुरैया इसको टोना, विसको टोना, राकस बान्हीं, मोकस बान्हीं, चुसूल बान्हीं, डाइन बान्हीं, भुल्चू बान्हीं ले बान्हीं कमरू कमच्छा दोहाई गुरु नरसिंह क.’ बाना बांधे गुरदम भांजे दोहाई गुरू नरसिंह कश् देवी के अस्त्र को बाना कहते हैं. हर चौरे पर लोहे का एक त्रिशुल (बाना) गड़ा रहता है. त्रिशुल के अतिरिक्त बाना डीह के आकार का बारीक कोड़े का भी बना होता है. उसको मोर के पंख के कूचें में सुरक्षित रखा जाता है. इसी बाने को अपने ठुड्डी जिह्वा, भुजा में बेधकर औझा बैगा अपने चमत्कार का प्रदर्शन करते हैं. बाने का भी एक मन्त्र है. यह मन्त्र है. यह मन्त्र एक सम्वाद के रूप में पढ़ा जाता है:– `लोहार बेटी! लोहार कहां गइल? `धवलगिरी’ `का करे?’ `छन्नन छावै.’ `चन्नन छाके का करिहैं?’ `कोयला बनइहैं.’ `कोयला बनाके का करिहैं?’ `छरी बनइहैं.’ `छूरी बना के का करिहैं?’ `टोना कटिहैं’ टायस कटिहैं, नाघन कटिहैं, पाघन कटिहैं, सात समुन्दर सोरह धार, कच्छ मच्छ ले बहवइहैं, दोहाई गुरू नरसिंह कश्. बाना की ही तरह औझाई का एक अस्त्र गुरदम होता है जो लोहे का बना होता है. लोहे के कड़े में दो सीकड़ें लटकती रहती हैं जिनके सिरे पर लोहे के दो गोले लगे होते हैं. ओझा कल्ले में अपना पंजा फंसाकर पैंतरा भांजते हुए, अपनी पीठ पर गर्दन के दोनो ओर से तीख प्रहार करता है. यह प्रक्रिया द्रुततर होती जाती है और उसकी पीठ लहू-लोहान हो जाती है. देवी के सवार हो जाने पर वह हबुआने लगता है. बिनघ-मसान कवन बोरै तपनी. दुद्धी स्थित छोटई ओझा से यह भी पता चला कि इस प्रक्रिया में घमसान बाबा की भी आराधना की जाती है. घमसान भी शक्ति के ही लोक-देवता हैं, जिनके विषय में यह कहावत प्रचलित हो गयी है– `बिन घमसान कवन बारे तपनी.’ यानी जो कार्य किसी देवता से नहीं होता उसे भी घमसान कर दिखाते हैं. इसलिए घमसान होना लोक में एक मुहावरा भी हो गया है. इसी प्रकार के एक देवता बघउत भी होते हैं. आज भी अनेक गांवो में धमसान और बघउत की पूजा प्रचलित है. बघउत बाबा बाघ की शक्ल के होते हैं. पकरहट के रामदास ने बताया कि जब कोई व्यक्ति बाध द्वारा मार डाला जाता है तो उसकी पूजा गांव में प्रचलित हो जाती है. गांव के लोग बघउत की पूजा मिट्टी का घोड़ा, हाथी और बाघ बनाकर करते हैं. `माटी का घोड़ा पाटी का लगाम……’ कहावत गांवों में आज भी प्रचलित है. टोना कला और शास्त्र की कसौटी पर खरा टोना-टोटका, तन्त्र-मन्त्र, ओझाई-देवाई आदि षट्कर्म महज ईर्ष्या द्वेष, प्रेम-प्रपंच, जोरू-जमीन आदि के लिए ही नहीं, कला के प्रदर्शन के लिए भी होते हैं. प्राय: गांवों में टोनहिनों में प्रतियोगिताएं भी होती हैं. एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए. एक भरे तालाब को सुखा देती है,. तो दूसरी उसे देखते ही देखते पुन: जल से भर देती है. एक टोना मारती है तो दूसरी उसे रोक लेती है. ऐसी प्रतियोगितिओं में वे एक दूसरे की जान तक ले लेने में नहीं हिचकती. पशु-पक्षियों पर प्रयोग तो आम बात है. उनके लिए वर्ष में दो-चार प्रयोग करना अपनी कला को जीवित करने के लिए अनिवार्य है. हिन्जेल, स्टासवर्ग, शियरर आदि जर्मनी के विद्वानों ने यह मत व्यक्त किया है कि जादू-टोना मन्त्र-तन्त्र सम्बन्धों कविताएं अतन्त प्राचीन काल से स्कैण्डिनेविया से लेकर इटली तक के अधिकांश देशों में पायी जाती रही हैं. भारत में तो आज भी ८० प्रतिशत लोग इसमें विश्वास करते हैं. जादू-टोना, भूत-प्रेत तथा टोटका आदि का सम्बन्ध ऋग्वेदकाल से माना जाता है. अथर्ववेद में तो अधिकतर इन्हीं सब विषयों का वर्णन है. आखिर क्या कारण है कि आज के वैज्ञानिक युग में भी ग्रामीण अंचलों में वृक्ष एवं पशु-पूजा जारी है? नीम, पीपल, बरगद आदि वृक्षों के नीचे देवी-देवता स्थापित किये जाते हैं. सेमर वृक्ष में सेमरहवा बाबा होते ही हैं इन्द्रासनी, गंवहेर, बनसत्ती, बघउत, धमसान आदि की पूजा में स्त्रियां प्राय: गीत गाती है. अक्सर वे गीत गाती है तो ओझा पर देवता सवार हो जाते हैं और वह हबुवाने लगता है. गांव में अक्सर ऐसे गीत सुनने को मिलते हैं:– अम्मा डगर चलश्नी सारी रतिया अम्मा के माथे टीका सोहे, दवनी है सोवरन की. अम्मा डगर चलश्नी सारी रतिया.” बीसवीं शताब्दी में भी भारतीय ग्रामीण जन, लोकविश्वासों के कटघरे में कैद हैं और हम स्वयं इन अविश्वसनीय सी लगती कथाओं के रूप खोजने में भटक जाते रहे हैं. अब तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में इसका एक विभाग ही खुलने जा रहा है. देखिये कितना कार्य होता है.

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