125 बच्चों की मौत पर भी नहीं चेते स्वास्थ्यकर्मी

मुजफ्फरपुर। बीते साल एईएस से जिले में सवा सौ बच्चों की मौत पर भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का दिल नहीं पिघला। उन्होंने बच्चों को एईएस से बचाव के लिए दिए जाने वाले टीके की झूठी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी। जिले में तीन फरवरी से चल रहे जेई के विशेष टीकाकरण अभियान की जांच में खुलासा हुआ कि प्रतिरीक्षण अधिकारी ने मुख्यालय को झूठी रिपोर्ट दी है। जांच में पाया गया कि छह प्रखंडों के बच्चे जेई के टीकाकरण से आज तक वंचित हैं। राज्य सरकार ने एईएस से बचाने के लिए शून्य से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को जेई  रोधी टीका देने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के आलोक में सभी प्रखंडों में जेई टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसके बाद जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने मुख्यालय को रिपोर्ट दी कि सभी प्रखंडों में शतप्रतिशत टीकाकरण का काम हो गया है। रिपोर्ट मिलने पर राज्य स्वास्थ्य समिति ने इसकी जांच कराई। इसके लिए अलग-अलग प्रखंड में अलग-अलग जांच अधिकारी को भेजा गया। जांच में यह खुलासा हुआ कि जिले के कांटी, मीनापुर, मोतीपुर, बोचहां, सरैया व मड़वन में शतप्रतिशत टीकाकरण की रिपोर्ट झूठी बनायी गई थी। इन प्रखंडों में जांच के दौरान 10 से 50 फीसदी तक बच्चे जेई के टीकाकरण से वंचित पाए गए। यह जांच पांच अधिकारियों की टीम ने छह प्रखंड के 25 गांव में किया। यदि जांच का दायरा बढ़ाकर पूरे जिले में किया जाए तो और भी चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं। बहरहाल, राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिन्हा ने इस मामले में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को फटकार लगाते हुए इस माह के अंत तक सौ फीसदी बच्चों का टीकाकरण कराने को कहा है। 

रिपोर्टर

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