मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुस्लिम मतदाताओं ने भरपूर दिया 'हाथ' का साथ


दिल्ली. 5 राज्यों में जनता ने सिंहासन पर किसे बैठाया है इसकी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है. रुझानों में कांग्रेस भाजपा को उसके गढ़ में हराता हुआ दिखाई दे रहा है. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों से भाजपा शासन कर रही थी, लेकिन 2018 में यहां कांग्रेस सत्ता की चाबी हथियाते हुए दिखाई दे रही है. भाजपा की हार के वैसे तो बहुत कारण हैं. मगर प्रमुख कारणों में से एक है अल्पसंख्यकों का खुलकर कांग्रेस का समर्थन करना. अल्पसंख्यक आबादी किसी पार्टी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाती है.

मध्यप्रदेश

राज्य में करीब 11 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. यहां मालवा, निमाड़ और भोपाल क्षेत्र की करीब 40 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव रहा है. सबसे ज्यादा लगभग 50 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता भोपाल उत्तर सीट में हैं. यहां लगातार 4 बार से कांग्रेस जीतती रही है.

राजस्थान

200 सीटों वाले इस राज्य में 10 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं जो 25 सीटों पर इपना प्रभाव डालते हैं. यहां से कांग्रेस ने 15 मुस्लिम और भाजपा ने सिर्फ एक मुस्लिम चेहरे और मंत्री यूनुस खान को सचिन पायलट के खिलाफ टोंक से उम्मीदवार बनाया था. 2013 में भाजपा ने चार मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था. जिसमें से 2 ने जीत हासिल की थी.

छत्तीसगढ़

यहां 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता है जिनका 4 सीटों पर प्रभाव है. यहां पर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 2 मुस्लिमों को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने भाजपा महासचिव सरोज पांडेय के गृहक्षेत्र बैशाली नगर से बदरुद्दीन और मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृहक्षेत्र कवर्धा से अकबर को टिकट दिया था.

तेलंगाना

राज्य में मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत 12 है. यहां से कांग्रेस ने 7, भाजपा ने 2, टीआरएस ने 3 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. राज्य की 119 में से 20 सीटों पर मुस्लिम प्रभाव है. हैदराबाद क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं.

मिजोरम

उत्तर पूर्व के इस राज्य में लगभग 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. यहां से दोनों प्रमुख पार्टियों ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है. यहां की केवल एक सीट पर मुस्लिम प्रभाव है.

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