कोरोना का असर: पैंट-शर्ट छोड़ टेलर सिल रहे हैं मास्क

बरेली। कोरोना वायरस के संक्रमण के खौफ ने बाजार की सूरत बदल दी है। जिला अस्पताल के सामने पहले जिन ठेलों पर पैंट, बनियान और दुपट्टे बिकते थे, अब वहां रंग-बिरंगे मास्क बिक रहे हैं। कीमत भी मनमर्जी की। प्रशासन को खबर नहीं और ड्रग विभाग को इसमें कोई खामी दिखाई नहीं दे रही है। चाइना से फैले कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता के साथ ही कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है। डाक्टर लगातार कह रहे हैं कि स्वस्थ्य आदमी को मास्क की कोई जरूरत नहीं है लेकिन मास्क की मांग बढ़ रही है। पहले मेडिकल स्टोर से मास्क गायब हुए और फिर शुरू हो गई इनकी कालाबाजारी। सात रुपये वाला मास्क 25 रुपये में बिक रहा है तो 22 से 25 रुपये वाला मास्क 90 से 100 रुपये में बेचा जा रहा है। इसी तरह बेहतर गुणवत्ता वाला मास्क 150 से 270 रुपये में बिक रहा है। 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क तो खोजे नहीं मिल रहा। मास्क और सेनेटाइजर की कालाबाजारी रोकने के लिए अब दोनों को आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल कर लिया गया है। 

 यहां बनाए जा रहे मास्क

पुराने शहर, किला, सुभाषनगर और इज्जतनगर इलाके में जो टेलर कल तक बैग, शर्ट, कुर्ते, सूट-सलवार सिला करते थे, उन्होंने इस समय मास्क बनाने का ठेका ले लिया है। मानकों की अनदेखी कर बनाए जा रहे इन मास्कों से मोटी कमाई हो रही है। मास्क के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।

 पहले बनाते थे बैग, अब मास्क

 पुराने शहर में कई लोग पहले कारखाने का ठेका लेते थे और घरों में बैग बनाते थे। आजकल मास्क बना रहे हैं। पुराने शहर के एक युवक ने बताया, कारखाने से रोजाना करीब 100 मास्क बनाने का आर्डर मिल रहा है। कई और लोग भी है जो साथ में काम करते हैं। बैग की बिक्री तो बंद है, मास्क की मांग बढ़ी है।

 कुर्ता-पायजामा छोड़ दिया, मास्क में मुनाफा 

 किला इलाके के एक टेलर को 5 हजार से अधिक मास्क बनाने का आर्डर दिया गया है। उसने बताया कि वह रोजाना 10 से 15 कुर्ते सिलता था। इस समय सिर्फ मास्क का आर्डर मिल रहा है। पूरा परिवार मास्क बनाने में जुटा है।

रिपोर्टर

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