अंक पत्र नहीं मिलने से शोधार्थियों में रोष

मधेपुरा बीएनएमयू के शोधार्थियों को पीएचडी एडमिशन टेस्ट का रिजल्ट प्रकाशन के नौ महीने बीत जाने के बाद भी छात्रों को अंक पत्र नहीं मिलने पर छात्रों में नाराजगी व्याप्त है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शोधार्थियों ने बुधवार को कुलपति से मिलकर समस्या समाधान की मांग की। वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों के व्यवहार से कुलपति खिन्न दिखे। इस बीच शोधार्थी और कुलपति के बीच नोंकझोंक भी हुई। कुलपति ने छात्रों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। शोधार्थियों ने कुलपति से अविलंब कोर्स वर्क की परीक्षा संचालित करने की मांग की। इससे पहले बुधवार को बीएनएमयू के पुराने परिसर में शोधार्थियों की एक बैठक हुई। जिसमे पीएचडी एडमिशन टेस्ट (पैट) के नौ माह गुजर जाने के बाद भी अंकपत्र नहीं मिलने और कोर्स वर्क की परीक्षा की सुगबुगाहट नहीं होने पर गंभीरता से चर्चा हुई। बैठक में कहा कि विश्वविद्यालय की यह लचर व्यवस्था छात्र हित में सही नहीं है। अगर अविलंब इसको लेकर पहल नहीं की गई तो उनलोगों की हालत भी 2011 बैच के शोधार्थियों जैसी हो जाएगी। बैठक के बाद शोधार्थियों ने कुलपति से मुलाकात कर मांगपत्र सौंपते हुए मांग पर अविलंब पहल की मांग की। लगभग एक घंटे तक चले बैठक में शोधार्थी द्वारा जीरो सेशन करने की मांग पर कुलपति फिर गये। कुलपति और शोधार्थियों के बीच नोक झोंक की नौबत गई। जिसे प्रतिकुलपति डॉ. फारुक अली, प्रॉक्टर डॉ. बीएन विवेका और प्रो. नरेश कुमार ने शांत कराया गया। शोधार्थी अपनी मांग पर अडिग थे कि ही उन्हें हर हाल में अंकपत्र मिले। कुलपति से मिलने वाले शोधार्थियों में मुख्य रूप से हर्षवर्द्धन सिंह राठौर, मो वसीम उद्दीन , सारंग तनय, सौरभ कुमार, सोनू यादव, दिलीप कुमार दिल, माधव कुमार, अक्षय सिद्धार्थ, यादव राजेश रंजन, हिमांशु कुमार, निशांत कुमार, विवेक कुमार, लक्ष्मण कुमार मौजूद रहे।

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