मजबूती के बजाय भाजपा के लिए घातक बन रहा गीता मिशन


कुमार राजेश 

मीरा-भायंदर। पिछले कुछ समय से पूर्व महापौर तथा भाजपा की नगरसेविका गीता भरत जैन द्वारा कहुआकर तथा असंतुष्ट खेमे द्वारा पर्दे के पीछे से आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जो भी गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वह भाजपा के लिए अशुभ तथा कांग्रेस के लिए शुभ संकेत देते दिखाई दे रहे हैं। गीता जैन या उनके करीबी अथवा उनके रणनीतिकारों की ओर से की जा रही गतिविधियां जाने-अनजाने में कांग्रेस के स्थानीय नेता और 145 विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के संभावित उम्मीदवार मुज्जफ्फर हुसैन की संभावित जीत में संजीवनी की भूमिका निभाती प्रतीत हो रही हैं। विदित हो कि मीरा-भायंदर के वर्तमान भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की स्थानीय राजनीति में पकड़ तथा पार्टी के परंपरागत राजस्थानी, गुजराती तथा जैन मतदाताओं में है, जिनकी भायंदर पश्चिम में बहुलता है। इस बड़े वोटबैंक में अगर सेंध लगती है, तो विधानसभा चुनाव में भाजपा का चुनावी गणित बिगड़ने में भी देर नहीं लगेगी। ज्ञात रहे, विधायक नरेंद्र मेहता और भाजपा की आज के वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा साल 2009 तक गिल्बर्ट मेंडोंसा के पाले में था। हालांकि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में गिल्बर्ट मेंडोसा को पराजय का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में भाजपा के नरेंद्र मेहता को 91,468 मत, राकांपा के गिल्बर्ट मेंडोसा को 59,176 मत, कांग्रेस के याकूब कुरैशी को 19,489 मत तथा शिवसेना के प्रभाकर म्हात्रे को 18,171 मत हासिल हुए थे। अब अगर गिल्बर्ट मेंडोंसा आगामी विधानसभा चुनाव में उतरते हैं तो भाजपा के वोटबैंक में और सेंध लगनी तय है। पूर्व महापौर, भाजपा से टिकट की उम्मीद और चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही गीता जैन की भी नजर और उम्मीद भी नरेंद्र मेहता और भाजपा की आज की वोटबैंक से है। अब तीसरी स्थिति कांग्रेस और मुज्जफ्फर हुसैन की, वो वोटबैंक जो नरेंद्र मेहता और भाजपा के आज के वोट बैंक से भले ही कम हो पर वह ठोस वोट बैंक है, जिसमें आसानी से सेंध लग पाना मुमकिन नहीं।एक अन्य पहलू यह भी है कि विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनाव होने हैं। भाजपा का राजनीतिक ग्राफ में कमी के चलते साल 2014 की मोदी लहर की बात करना यहां गलत होगा। ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद केंद्र में भाजपा सरकार नहीं बना पाई तो मीरा भायंदर का वातावरण भाजपा में इनकमिंग की बजाय आऊट गोईंग की बन सकती है। ऐसी स्थिति में सभी आकलन भाजपा के संभावित उम्मीदवार नरेंद्र मेहता के लिए अच्छे नहीं कहे जा सकते। अगर भाजपा की ताकत को बढ़ाना है, तो भाजपा को अपनी ताकत उन प्रभागों में झोंकनी चाहिए, जहां से भाजपा महानगरपालिका चुनाव हारी या कम मतों के अंतर से जीती थी। यदि गीता जैन और अन्य भाजपा नेताओ की पहली प्राथमिकता भाजपा उम्मीदवार को ही जिताना और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार मुज्जफ्फर हुसैन को हराना है, तो इन्हें 145 विधानसभा क्षेत्र में आने वाले उन प्रभागों में ध्यान देना चाहिए, जहां कांग्रेस और शिवसेना के नगरसेवक है, लेकिन ऐसा नरेंद्र मेहता को छोड़ किसी अन्य भाजपा नेता की करनी में फिलहाल नहीं दिख रहा। दूसरी ओर कांग्रेस के संभावित उमीदवार मुज्जफ्फर हुसैन इसी कोशिश में जुटे हुए हैं कि उनका वोट बैंक सलामत रहे। कयास लगाए जा रहे हैं कि हुसैन की कोशिश है कि भाजपा विरोधी नगरसेवकों के प्रभाग में उन्हें सर्वाधिक वोट और निर्णायक बढ़त मिले, बाकी भाजपा नगरसेवकों के जनाधार वाले प्रभागों में वोट बंट जाएं। गौरतलब है कि गीता जैन और अन्य भाजपा नेता नरेंद्र मेहता के विरोध में जाने-अनजाने यह गलती कर रहे हैं और आगे भी करेंगें, तो लाभ मुज्जफ्फर हुसैन का ही होना है। जाहिर है कि भाजपा आलाकमान की चुप्पी, गीता जैन और भाजपा के अन्य स्थानीय नेताओं की महत्वाकांक्षा, मनपा में बढ़ता भ्रष्टाचार और नरेंद्र मेहता की भूमिका से भाजपा के इस मजबूत गढ़ में भी सेंध लग जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। 

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