शैक्षणिक सत्र समाप्ति की ओर, अब बच्चों को मीरा-भायंदर मनपा बांट रही सामग्रियां


मीरा-भायंदर। वर्तमान शैक्षणिक सत्र समाप्त होने में महज अगले डेढ़ से दो महीने ही बचे हैं, बावजूद इसके मनपा की कुंभकर्णी नींद अब धीरे-धीरे टूट रही है। मनपा प्रशासन पूरे शैक्षणिक वर्ष इंतजार करने वाले मनपा स्कूलों के विद्यार्थियों को गणवेश, नोटबुक, पीनी की बोतलें, स्कूल बैग समेत शैक्षणिक वस्तुएं मुहैया कराने को सक्रिय हुआ है। मनपा की इस लापरवाही के विरुद्ध विद्यार्थियों के साथ ही उनके अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। विदित हो कि मनपा प्रशासन ने शैक्षणिक सामग्रियों की रकम विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में सीधे भेजने के लिए बैक में खाता खोलने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन अधिकांश अभिभावकों ने रकम को अन्यत्र खर्च कर विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सामग्रियों को नहीं खरीदा। कई अभिभावकों ने तो बैंकों में खाते ही नहीं खोले। जिन अभिभावकों ने सामग्रियों की खरीदी के बिल जमा किए, मनपा प्रशासन द्वारा उनके खाते में उक्त रकम जमा कराई गई, जबकि अधिकांश विद्यार्थी इस आपाधापी में शैक्षणिक सामग्रियों से वंचित रह गए। लिहाजा प्रशासन ने अपनी पॉलिसी में सुधार करते हुए पुनः पूर्व की भाँति मनपा स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सामग्रियों को उपलब्ध कराने की कवायद शुरू की। गौरतलब है कि

 

मीरा-भायंदर मनपा मराठी, हिंदी, गुजराती एवं उर्दू माध्यम की पहली से 8 कक्षा तक की कुल 36 स्कूलों का संचालन कर रहा है, जिसमें 7,8,34 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन मनपा स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब तथा मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को मनपा प्रशासन द्वारा शैक्षणिक सामग्रियों की 27 वस्तुएं मुफ्त में मुहैया कराई जाती हैं। वहीं जूता-मोजा, बस्तों के लिए विद्यार्थियों से प्रति विद्यार्थी 710 रूपए वसूले जाते हैं। यह सभी शैक्षणिक सामग्रियां शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले दिन ही विद्यार्थियों को मुहैया कराना जरूरी है, इसके पीछे कारण यह है कि नवीन कक्षा में प्रवेश लेने वाले तथा नए विद्यार्थियों के अभिभावकों को तनाव न झेलना पड़े। साथ ही विद्यार्थियों को उक्त सामग्रियों का उपयोग करने में आसानी हो। मनपा स्कूलों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्रियों को मुहैया कराने के लिए पिछले वर्ष सत्र शुरू होने के उपरांत 26 जुलाई 2018 की महासभा में प्रस्ताव मंजूर किया, जिसके बाद 8 अगस्त को इसके लिए निविदा जारी की गई। निविदा भरने के लिए महज दो ठेकेदार अमरदीप उद्योग तथा नवकार यूनिफार्म योग्य पाए गए। 27 नवंबर को स्थायी समिति की बैठक में निविदा को मंजूरी दी गई थी। जिसमें गणवेश आपूर्ति का ठेका नवकार यूनिफार्म को दिया गया। ठेकेदार ने गणवेश की दर 325 से 650 रूपए तक लगाई है। अन्य वस्तुओं की आपूर्ति का ठेका अमरदीप उद्योग तथा थ्री स्टार कंपनी को दिया गया। नवंबर में मंजूर हुई निविदा का एग्रीमेंट जनवरी में करने के उपरांत ठेके का कार्यादेश इस वर्ष 22 जनवरी को जारी किया गया। जिसके बाद स्कूलों में शैक्षणिक सामग्रियां पहुंचाईं गईं, जबकि अभिभावकों से पैसा वसूल कर विद्यार्थियों को बस्ते तथा जूते दिए गए। मनपा की इस लापरवाही पर आक्रोश व्यक्त करते हुए श्रमजीवी कामगार संगठन के मीरा-भायंदर जिलाध्यक्ष सुल्तान पटेल ने कहा कि बच्चों के स्कूल शुरू होने के कुछ महीने पूर्व निविदा आदि प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है। इसमें लेटलतीफी के चलते विद्यार्थियों को छह महीने तक शैक्षणिक सामग्रियों से वंचित रहना पड़ा। पटेल ने इसके लिए मनपा के शिक्षणाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि मजबूरी में अभिभावकों को बच्चों के नोटबुक आदि की खरीदी के लिए जेब से पैसे खर्च करने पड़े। अब इन सामग्रियों का बच्चों के लिए उपयोग ही क्या है। इस बाबत मनपा उपायुक्त दीपक पुजारी ने कहा कि राज्य शासन के सुधारित आदेश आने के बाद ही मनपा द्वारा शैक्षणिक सामग्रियों की खरीदी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। जिससे निविदा आदि प्रक्रिया में देरी हुई। आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए यह प्रक्रिया हमने अभी से ही शुरू कर दी है। शिवसेना के युवा इकाई के जिला प्रमुख सलमान हाशमी ने कहा कि मनपा प्रशासन तथा सत्ताधारी भाजपा ने गरीब विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो कार्यक्रमों पर करोड़ों रूपए की फिजूलखर्ची की जाती है, जिसके लिए लाखों रूपए मनपा प्रशासन तुरंत मंजूर कर देता है, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सामग्रियों को मुहैया न कराना शर्मनाक है। सलमान हाशमी ने मनपा आयुक्त से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने के साथ ही ठेकेदारों द्वारा आपूर्ति की गई वस्तुओं की गहराई से जांच कराने की माँग की है।

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