अदालत के आदेश पर CCTV लगते ही बंद हो गए पड़ोसियों में झगड़े


अदालत ने दो पड़ोसियों को सीसीटीवी लगाने की शर्त क्या रखी, महीनों पुराने उनके विवाद बंद हो गए। दोनों ने एक दूसरे पर महिलाओं के साथ बदसलूकी, छेड़खानी जैसी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करा रखी थी और आए दिन पुलिस को शिकायत करते थे। सीसीटीवी लगते ही उनकी शिकायतें बंद हो गईं।

पुलिस ने इस मामले में अदालत में रिपोर्ट पेश कर बताया कि पिछले छह महीने में दोनों परिवारों के बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ है। दरअसल अदालत ने इन दोनों परिवारों को जमानत देते हुए कहा था कि अब जब भी एक-दूसरे की शिकायत करें तो उसकी सीसीटीवी फुटेज पेश करें, जिससे साबित हो सके कि वास्तविकता में क्या घटित हुआ था। 

पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि अदालत की इस शर्त का इन परिवारों पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। यहां तक कि पुलिस ने इस बीच खुद कई बार जाकर दोनों परिवारों के हालात का जायजा लिया। पुलिस ने उनसे पूछा भी कि क्या किसी से कोई झगड़ा हुआ है लेकिन दोनों तरफ से कहा गया कि अब उन्हें एक-दूसरे से कोई शिकायत नहीं है।

बेमतलब की मुकदमेबाजी को रोका : रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पांडे की अदालत के समक्ष यह मामला आया था। अदालत ने पाया कि दोनों ही पक्षकार पड़ोसी हैं और इन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ परिवार की महिलाओं के साथ छेड़खानी, मारपीट व बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज कराए हुए हैं। इतना ही नहीं, आए दिन दोनों परिवार पुलिस को कॉल कर एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करते रहते हैं। इस कारण विवाद बढ़ता जा रहा था। अदालत ने विवाद को सुलझाने के लिए पड़ोसियों को सीसीटीवी लगाने के लिए कहा ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

रिपोर्टर

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